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CM के खिलाफ बोलना देशद्रोह नहीं, जमानत देकर कोर्ट ने नेता को राहत दी

Nil dhankar
15 July 2026 6:44 AM IST
CM के खिलाफ बोलना देशद्रोह नहीं, जमानत देकर कोर्ट ने नेता को राहत दी
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पुणे। एक सेशन कोर्ट ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के सोशल मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष महादेव बलगुडे को जमानत देते हुए कहा कि सरकार या मुख्यमंत्री की आलोचना करना, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ना या राष्ट्र की संप्रभुता को खतरे में डालना नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने कहा कि हर नागरिक को सरकार के कामकाज पर टिप्पणी करने, उसकी सराहना करने और आलोचना करने का संवैधानिक अधिकार है.

सुनवाई के दौरान महादेव बलगुडे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता समीर शेख ने दलील दी कि मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है और सरकार की आलोचना करना संविधान के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है. वहीं, अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया और राज्य के खिलाफ अपराध किए हैं.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बी. डी. कुलकर्णी ने बलगुडे की जमानत याचिका मंजूर करते हुए कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो कि आरोपी ने राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने की घोषणा की हो, लोगों को इसके लिए उकसाया हो या भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाला कोई कृत्य किया हो. महादेव बलगुडे को इसी वर्ष अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था. बलगुडे पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कथित रूप से मॉर्फ्ड तस्वीरें साझा कीं और कुछ ऐसे पोस्ट किए जिन्हें जांच एजेंसियों ने नक्सलियों के प्रति सहानुभूति रखने वाला बताया. पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 सहित कई अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था. बीएनएस की धारा 152 भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को जानबूझकर खतरे में डालने से संबंधित है.

सेशन कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि केस डायरी से पता चलता है कि आरोपी ने कुछ मामलों की जांच प्रक्रिया और सरकार की योजनाओं के कामकाज पर सवाल उठाए थे. यह लोकतांत्रिक व्यवस्था में सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा है और इसे स्वतः राष्ट्रविरोधी गतिविधि नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में बीएनएस की धारा 152 लागू होना स्वयं विवाद का विषय है, जबकि बाकी सभी आरोप जमानती प्रकृति के हैं. कोर्ट ने यह भी माना कि जांच पूरी हो चुकी है, चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और अब आरोपी से आगे किसी तरह की हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है. महादेव बलगुडे को जमानत देते हुए कोर्ट ने उन्हें 25 हजार रुपये के निजी मुचलके और एक या दो जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया. साथ ही कोर्ट ने सबूतों से छेड़छाड़ न करने, गवाहों को प्रभावित न करने, जांच अधिकारी को अपना पता और मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने और कोर्ट की अनुमति के बिना देश छोड़कर नहीं जाने की शर्तें भी लगाईं.

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