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सुरक्षाबल और ग्राम रक्षा समितियाें ने आतंकवादी को मिलकर खदेड़ा

jantaserishta.com
13 Aug 2023 8:18 AM GMT
सुरक्षाबल और ग्राम रक्षा समितियाें ने आतंकवादी को मिलकर खदेड़ा
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श्रीनगर: 4 साल पहले 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा दिया था जिसके बाद से आतंकवादियों से निपटने की प्रक्रिया में काफी बदलाव आए हैं। अनुच्छेद 370 हटने के बाद सबसे महत्वपूर्ण विकास राजौरी और पुंछ जैसे क्षेत्रों में निष्क्रिय ग्राम रक्षा समितियों (वीडीसी) के पुनरुद्धार का रहा है। एक समय में इस क्षेत्र को आतंकवाद से मुक्‍त माना जाता था। यहां आतंकवादी गतिविधियों को पनपते हुए देखा गया। अनुच्छेद 370 हटने के बाद यहां पर स्थानीय रक्षा तंत्र को मजबूत होते देखा गया।
वीडीसी सदस्यों ने 5 अगस्त को राजौरी जिले के गुंडा खवास वन क्षेत्र में एक मुठभेड़ के दौरान एक आतंकवादी को मार गिराने में अहम भूमिका निभाई थी। वीडीसी सदस्‍य गांव में आतंकवादियों की मौजूदगी का पता लगाने वाले पहले व्यक्ति थे। वीडीसी ने पुलिस के साथ मिलकर गोलीबारी की जिसके परिणामस्वरूप एक आतंकवादी मारा गया।
वीडीसी की त्वरित कार्रवाई ने ग्रामीणों को आतंकवादियों की गोलीबारी से बचा लिया, उस समय समुदाय को संभावित आतंकवादी खतरों से बचाने के लिए निरंतर गश्त की गई थी। ऑपरेशन को याद करते हुए वीडीसी सदस्य यशपाल ने कहा, ''कुछ हलचल महसूस करने के बाद हमने आंतकवादियों के खिलाफ एक संयुक्त अभियान चलाया। एक व्यक्ति ने उसे रोकने का प्रयास किया, लेकिन उसने हम पर गोलियां चला दीं। हमारी जवाबी कार्रवाई के दौरान हमने उसे गिराया। वहीं, दूसरा आतंकवादी जंगलों में भागने में कामयाब रहा, लेकिन हम सतर्क रहे।''
एक अन्य वीडीसी सदस्य सुरजीत ठाकुर ने सुरक्षा उपायों को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्‍होंने कहा, ''डर के माहौल के कारण लोग घबराए हुए थे। हमारे युवा भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। मैंने प्रशासन से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्र में अर्धसैनिक बलों की एक चौकी स्थापित करने की अपील की। वीडीसी के पास सीमित गोला-बारूद था, जबकि आतंकवादी स्वचालित हथियारों से लैस थे। पुरानी बंदूकों से स्वचालित राइफलों का मुकाबला करना चुनौतीपूर्ण था।''
ठाकुर ने कहा, हमें अपनी उपलब्धियों पर गर्व है। अगर हम स्वचालित राइफलों से लैस होते तो हम आतंकवादियों के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षा बलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होेते। 1 जनवरी को राजौरी के ढांगरी में हुए दुखद नरसंहार के बाद, राजौरी और पुंछ जिलों में वीडीसी के पुनरुद्धार ने इन समितियों को नया जीवन दिया।
ढांगरी हमले में आतंकवादियों ने चार घरों पर हमला किया, जिसके परिणामस्वरूप पिता-पुत्र सहित चार लोगों की मौत हो गई, जबकि छह अन्य घायल हो गए। अगली सुबह एक शक्तिशाली आईईडी विस्फोट ने दो नाबालिग चचेरे भाइयों की जान ले ली।
वीडीसी जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सबसे आगे हैं, जो आतंकवाद को खत्म करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों के प्रयासों का पूरक हैं। सेना की रोमियो फोर्स के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल मोहित त्रिवेदी ने सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय जनता के बीच प्रयासों पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, ''यह ऑपरेशन सुरक्षा एजेंसियों और लोगों के बीच समन्वय का परिणाम था। क्षेत्र में चल रहे ऑपरेशन आतंकवादियों के लिए जगह कम कर रहे हैं। ये ऑपरेशन राष्ट्र-विरोधी तत्वों के खिलाफ जारी रहेंगे। वीडीसी की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि सुरक्षा एजेंसियां पीर पंजाल क्षेत्र में पनप रहे आतंकवाद को खत्म करने के अपने प्रयासों को तेज कर रही हैं। सुरक्षा बलों के साथ मिलकर सहयोग करने वाले कुशल व्यक्तियों वाली इन समितियों ने जम्मू प्रांत के दूरदराज के इलाकों में अपनी प्रभावशीलता साबित की है। जनता के बीच सुरक्षा की भावना पैदा करते हुए वीडीसी आतंकवादी खतरों के खिलाफ खड़े हैं।
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