भारत

साइंटिस्ट बेटे ने मां की संघर्ष भरी जिंदगी की कहानी शेयर की, पढ़ाने बेची थी पहनी हुई चुड़िया

Nil dhankar
1 Feb 2026 7:22 AM IST
साइंटिस्ट बेटे ने मां की संघर्ष भरी जिंदगी की कहानी शेयर की, पढ़ाने बेची थी पहनी हुई  चुड़िया
x

तमिलनाडु। सोशल मीडिया पर एक ऐसी कहानी वायरल हो रही है, जिसने मेहनत, मां की कुर्बानी और हौसले की असली तस्वीर दिखा दी है. यह कहानी है उस शख़्स की, जिसने कॉलेज के दिनों में किताबें खोलने के लिए न लाइब्रेरी ढूंढी, न कोचिंग—बल्कि एक शांत रेलवे प्लेटफॉर्म को ही अपना क्लासरूम बना लिया. तमिलनाडु के उसी प्लेटफॉर्म पर बैठकर की गई पढ़ाई ने आगे चलकर उन्हें एक सफल वैज्ञानिक बना दिया. इस प्रेरणादायक सफर को डॉ. ए. वेलुमणि ने खुद सोशल मीडिया पर साझा किया है, जो अब लाखों लोगों को मेहनत और अनुशासन का मतलब समझा रही है.

डॉ. वेलुमणि ने बताया कि साल 1974 से 1978 के बीच वे कोयंबटूर के श्री रामकृष्ण मिशन विद्यालय में पढ़ते थे. उस समय उनकी आर्थिक हालत बहुत खराब थी. शहर के कॉलेजों में पढ़ाई और हॉस्टल का खर्च उनके बस का नहीं था. इसलिए उन्होंने ऐसा कॉलेज चुना, जहां फीस और रहने का खर्च कम था. हॉस्टल की फीस भी वे नहीं दे पा रहे थे, इसलिए शहर में एक सरकारी मुफ्त हॉस्टल में रहने लगे. लेकिन कॉलेज आने-जाने का किराया भी उनके लिए भारी था. बस से रोज आना-जाना महंगा पड़ता था. तब उन्होंने पैसेंजर ट्रेन का सहारा लिया, जिसमें छात्रों का पास बहुत सस्ता था. इस फैसले से उनकी दिनचर्या पूरी तरह बदल गई. सुबह बहुत जल्दी ट्रेन पकड़नी पड़ती थी और शाम को देर से घर लौटते थे. कॉलेज की पढ़ाई के बाद उनके पास रोज़ कई घंटे खाली रहते थे।

डॉ. वेलुमणि ने लिखा- मैं उन घंटों में रेलवे प्लेटफार्म पर बैठकर मैथ्स, फिजिक्स और केमिस्ट्री पढ़ता था. उन्होंने बताया कि करीब 1000 दिनों तक और लगभग 6000 घंटे उन्होंने प्लेटफॉर्म पर पढ़ाई की. यही मेहनत आगे चलकर उन्हें भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) में नौकरी दिलाने में मददगार बनी. उन्होंने यह भी बताया कि उन दिनों उनकी मां ही घर की अकेली कमाने वाली थीं और बहुत कम पैसे कमाती थीं. परिवार पर बोझ न पड़े, इसलिए उन्होंने हर तकलीफ सहन की. एक समय उनकी मां ने कॉलेज की फीस भरने के लिए अपनी चूड़ियां तक बेच दी थीं.

डॉ. वेलुमणि का कहना है कि उनकी सफलता के पीछे चार बातें थीं- धैर्य, मेहनत, सादगी और अनुशासन. पोस्ट के लास्ट में उन्होंने एक भावुक बात लिखी. उन्होंने बताया कि बाद में वे अपनी पत्नी को उसी रेलवे प्लेटफॉर्म पर ले गए और कहा- यहीं से एक वैज्ञानिक बना था. इस पोस्ट के साथ उनकी एक तस्वीर भी है, जिसमें वे रेलवे प्लेटफॉर्म पर खड़े होकर पटरियों की ओर इशारा कर रहे हैं और उनके साथ उनकी पत्नी भी हैं. सोशल मीडिया पर लोगों ने इस कहानी की खूब तारीफ की. एक यूजर ने लिखा- यह गरीबी की नहीं, मकसद और मेहनत की कहानी है. दूसरे ने कहा- ऐसी कहानियां हमें सिखाती हैं कि सफलता धीरे-धीरे मिलती है, रातों-रात नहीं. ' यह कहानी आज के युवाओं के लिए एक बड़ी सीख बन गई है.

Next Story
null