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हिमाचल में बनी 53 दवाइयों के सैंपल फेल, CDSCO की जांच में पाई गईं सब स्टैंडर्ड

Shantanu Roy
22 Jan 2026 3:12 PM IST
हिमाचल में बनी 53 दवाइयों के सैंपल फेल, CDSCO की जांच में पाई गईं सब स्टैंडर्ड
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बीबीएन। केंद्रीय औषधि नियंत्रक मानक संगठन की जांच में हिमाचल के दवा उद्योगों में निर्मित 51 दवाए गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतर पाई है। इनमें हाई ब्लड प्रेशर, हृदय व कोलेस्ट्रॉल, एलर्जी अस्थमा, एंटीबायोटिक, दर्द, बुखार, एसिडिट, न्यूरोलॉजी, कृमि रोग, कैल्शियम की कमी और बच्चों की खांसी-जुकाम से जुड़ी दवाएं शामिल हैं। यह खुलासा दिसंबर माह के ड्रग अलर्ट में हुआ है। देशभर में जांच के दौरान विभिन्न राज्यों में स्थित दवा उद्योगों में निर्मित 167 दवाएं तय मानकों पर खरी नहीं उतरीं, जिनमें हिमाचल प्रदेश में निर्मित 53 दवाएं भी शामिल हैं। टैबलेट, सिरप, नेजल स्प्रेए, ड्रॉप्स, क्रीम और इंजेक्शन जैसी आम इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं में खामियां मिलने के बाद प्रदेश के फार्मा उद्योग पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। देश में दवाओं की गुणवत्ता पर निगरानी रखने वाली शीर्ष नियामक संस्था सीडीएससीओ की दिसंबर माह की मासिक ड्रग अलर्ट रिपोर्ट के अनुसार ये दवा नमूने केंद्र और राज्य स्तरीय औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं में जांच के दौरान फेल पाए गए।
रिपोर्ट में केंद्रीय औषधि प्रयोगशालाओं द्वारा 74 और राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं द्वारा 93 दवा नमूनों को नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी घोषित किया गया है। इनमें हिमाचल प्रदेश में निर्मित कुल 51 दवाएं गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं। इनमें 31 दवाएं स्टेट ड्रग लैब्स की जांच मेंए जबकि 20 दवाएं सीडीएससीओ की सेंट्रल व रीजनल लैब्स में फेल पाई गई हैं। ये दवाएं बद्दी, नालागढ़, बरोटीवाला, सोलन, संसारपुर टैरेस, कालाअंब, पांवटा साहिब, परवाणू और ऊना स्थित उद्योगोंं में निर्मित बताई गई हैं। दिसंबर के ड्रग अलर्ट में सात दवा नमूनों को स्प्यूरियस (नकली) पाया गया है। इनमें उत्तर क्षेत्र से चारए गाजियाबाद से एकए एफडीए अहमदाबाद से एकए बिहार से एक तथा महाराष्ट्र से एक दवा नमूना शामिल है। इन दवाओं का निर्माण अनधिकृत निर्माताओं द्वारा अन्य कंपनियों के ब्रांड नामों का दुरुपयोग कर किया था। सभी मामलों में जांच जारी है। नियमों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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