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Market. मंडी। अमरीका-कनाडा मॉडल पर अब भारत की सडक़ें बनेंगी। उत्तर प्रदेश से इसकी शुरुआत हुई थी और उसके बाद बिहार, असम और झारखंड में इस तकनीक से सडक़ निर्माण कार्य किए गए। हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2023 में एफडीआर तकनीक से सडक़ निर्माण कार्य करवाने का निर्णय लिया गया और बिलासुपर में ट्रायल हुआ। प्रदेश में इस तकनीक का पहला प्रमुख प्रोजेक्ट बिलासपुर जिला के घुमारवीं उपमंडल की गाहर-नसवाल सडक़ पर वर्ष 2024 में शुरू हुआ, जिसके बाद अब प्रदेश सरकार ने 666 किलोमीटर सडक़ों पर इस तकनीक से कार्य करने का फैसला लिया है।
लगभग 70 प्रतिशत से अधिक सडक़ों को कार्य भी पूरा किया जा चुका है। हिमाचल प्रदेश में सडक़ निर्माण के क्षेत्र में अब आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक एफडीआर (फुल डेप्थ रिक्लेमेशन) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के तहत प्रदेश में सैकड़ों किलोमीटर सडक़ों का निर्माण और उन्नयन इस तकनीक से किया जा रहा है। मंडी और कुल्लू में 20 सडक़ें इस तकनीक से बनी हैं। इसके अलावा कांगड़ा, हमीरपुर, शिमला, सिरमौर और बिलासपुर जिलों में कई सडक़ परियोजनाओं में इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। मंडी जिला के करसोग क्षेत्र में लगभग 53 किलोमीटर लंबाई की चार सडक़ों का निर्माण एफडीआर तकनीक से किया जा रहा है। सडक़ भी इस तकनीक से बनी है।
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