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धान की फसल पर बढ़ा नए रोग का खतरा , दाने नहीं भरने पर उपज में भारी गिरावट ....

Rajeshwari Nishad
3 Oct 2026 3:12 PM IST
धान की फसल पर बढ़ा नए रोग का खतरा ,  दाने नहीं भरने पर उपज में भारी गिरावट  ....
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Rice Crop Disease: धान भारत की खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ करोड़ों किसानों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। देश के अलग-अलग हिस्सों में धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है, लेकिन बदलते मौसम, बढ़ते तापमान और बारिश के बदलते पैटर्न के बीच फसल को कई नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं चुनौतियों में धान का एक गंभीर जीवाणु रोग बैक्टीरियल पैनिकल ब्लाइट भी शामिल है। यह रोग खास तौर पर धान की बाली और दानों को प्रभावित करता है, जिससे दाने ठीक से विकसित नहीं हो पाते और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के पोस्ट ग्रेजुएट डिपार्टमेंट ऑफ प्लांट पैथोलॉजी एवं नेमेटोलॉजी के प्रोफेसर (डॉ.) एसके सिंह के अनुसार, बैक्टीरियल पैनिकल ब्लाइट धान की फसल के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस रोग का प्रभाव पौधे के उस महत्वपूर्ण हिस्से पर पड़ता है, जहां दानों का विकास होता है। संक्रमण गंभीर होने पर बाली और दानों की वृद्धि प्रभावित हो जाती है और किसान को उपज में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
Burkholderia glumae से होता है रोग
विशेषज्ञ के मुताबिक बैक्टीरियल पैनिकल ब्लाइट मुख्य रूप से Burkholderia glumae नामक जीवाणु के कारण होता है। यह जीवाणु अनुकूल मौसम मिलने पर धान की फसल में तेजी से फैल सकता है। खासकर गर्म और नम वातावरण इस रोग के विकास और प्रसार के लिए अनुकूल माना जाता है।
बदलते मौसम की परिस्थितियां इस समस्या को और गंभीर बना सकती हैं। तापमान बढ़ने के साथ यदि खेतों में लंबे समय तक नमी बनी रहे या वातावरण में आर्द्रता अधिक हो, तो जीवाणु संक्रमण के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं। ऐसे में धान की संवेदनशील अवस्था में रोग का प्रभाव बढ़ने की आशंका रहती है।
बाली और दानों पर सीधा असर
बैक्टीरियल पैनिकल ब्लाइट की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह धान की बाली और दानों को सीधे प्रभावित करता है। सामान्य स्थिति में धान की बालियों में फूल आने के बाद दाने धीरे-धीरे भरते हैं और पकने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, लेकिन रोग का संक्रमण होने पर यह प्रक्रिया बाधित हो सकती है।
डॉ. एसके सिंह के अनुसार, संक्रमित पौधों में दाना ठीक से नहीं भरता। कई मामलों में बाली के कुछ हिस्सों में दाने कमजोर, हल्के या अधूरे रह सकते हैं। इससे खेत में खड़ी फसल देखने में सामान्य दिखाई दे सकती है, लेकिन कटाई के समय वास्तविक नुकसान सामने आता है। दानों की गुणवत्ता और वजन दोनों प्रभावित होने से कुल उत्पादन कम हो सकता है।
गर्म और नम मौसम में बढ़ता खतरा
इस रोग के फैलाव में मौसम की भूमिका महत्वपूर्ण है। गर्म तापमान और अधिक नमी वाला वातावरण Burkholderia glumae के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर सकता है। ऐसे मौसम में यदि धान की फसल संक्रमण के प्रति संवेदनशील अवस्था में हो, तो रोग का खतरा बढ़ सकता है।
बारिश के समय में बदलाव भी इस समस्या को प्रभावित कर सकता है। कभी लंबे समय तक बारिश और नमी की स्थिति बनना तथा उसके बाद अचानक तापमान बढ़ना फसल के लिए प्रतिकूल परिस्थितियां पैदा कर सकता है। यही वजह है कि वैज्ञानिक और कृषि विशेषज्ञ बदलते मौसम के बीच धान के खेतों की नियमित निगरानी पर जोर देते हैं।
किसानों के लिए समय रहते पहचान जरूरी
बैक्टीरियल पैनिकल ब्लाइट से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए रोग की समय पर पहचान महत्वपूर्ण मानी जाती है। किसान खेत का नियमित निरीक्षण करें और विशेष रूप से धान की बाली निकलने तथा दाने बनने की अवस्था में पौधों पर नजर रखें। यदि पौधों की बालियों में असामान्य लक्षण दिखाई दें या दानों के विकास में समस्या नजर आए, तो कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेना जरूरी है।
किसानों को बिना पहचान के किसी भी दवा या रसायन का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। रोग का कारण जीवाणु है, इसलिए केवल सामान्य फफूंदनाशकों के इस्तेमाल से हर स्थिति में अपेक्षित परिणाम मिलना जरूरी नहीं है। सही रोग की पहचान के बाद ही विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार प्रबंधन की रणनीति अपनाना अधिक उचित है।
मौसम परिवर्तन से बढ़ सकती है कृषि चुनौतियां
धान समेत कई फसलों पर बदलते मौसम का प्रभाव कृषि वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। तापमान में वृद्धि, अनियमित बारिश, अधिक आर्द्रता और मौसम में अचानक बदलाव से कई रोगों और कीटों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं।
ऐसे में फसल प्रबंधन को केवल सिंचाई और उर्वरक तक सीमित रखने के बजाय मौसम आधारित निगरानी और रोग प्रबंधन पर भी ध्यान देना जरूरी है। खेत की स्थिति, मौसम और फसल की अवस्था को देखते हुए किसानों को समय-समय पर कृषि विभाग या कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेना चाहिए।
उपज बचाने के लिए सतर्कता जरूरी
धान की फसल में बैक्टीरियल पैनिकल ब्लाइट का खतरा किसानों के लिए इसलिए गंभीर है क्योंकि इसका सीधा प्रभाव दानों के भराव और उत्पादन पर पड़ सकता है। यदि रोग का संक्रमण व्यापक हो जाए, तो खेत की संभावित उपज में उल्लेखनीय गिरावट आ सकती है।
विशेषज्ञ डॉ. एसके सिंह की जानकारी से यह स्पष्ट होता है कि Burkholderia glumae से होने वाला यह रोग गर्म और नम मौसम में अधिक चुनौतीपूर्ण बन सकता है। इसलिए धान की संवेदनशील अवस्था में खेतों की निगरानी, लक्षणों की समय पर पहचान और विशेषज्ञ सलाह के आधार पर रोग प्रबंधन बेहद जरूरी है।
धान भारत की खाद्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए फसल में उभर रही ऐसी नई चुनौतियों को समय रहते समझना और उनका वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करना किसानों के साथ-साथ कृषि क्षेत्र के लिए भी बेहद जरूरी हो जाता है।
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