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पठानकोट-मंडी फोरलेन शुरू होने से पहले डंगों का फूलने लगा दम

Shantanu Roy
22 Jun 2026 2:12 PM IST
पठानकोट-मंडी फोरलेन शुरू होने से पहले डंगों का फूलने लगा दम
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Paraur. परौर। पठानकोट-मंडी फोरलेन परियोजना एक बार फिर सवालों के घेरे में है। करोड़ों रुपए की लागत से तैयार हो रहे इस महत्त्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार और घटिया गुणवत्ता अब खुलकर सामने आने लगी है। हालात यह हैं कि परियोजना का काम अभी तक अधूरा पड़ा है और मौजूदा गति को देखते हुए इसके निर्धारित समय में पूरा होने की संभावना बेहद कम नजर आ रही है। दूसरी ओर जहां-जहां निर्माण हुआ है, वहां गुणवत्ता को लेकर गंभीर खामियां दिखाई देने लगी हैं। 61 मील सुरंग से लेकर ठानपुरी तक कई स्थानों पर सडक़ किनारे बनाई गई रिटेनिंग वॉल कमजोर पड़ती दिखाई दे रही हैं।

कई जगह पत्थर बाहर की ओर फूल चुके हैं। बरसात शुरू होने से पहले ही यह स्थिति सामने आने से स्थानीय लोगों और वाहन चालकों में भारी चिंता है। लोगों का कहना है कि यदि अभी यह हालत है, तो भारी बारिश के दौरान कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। वर्षों से लोग धूल, जाम और अव्यवस्थित यातायात की परेशानी झेल रहे हैं। कई स्थानों पर मशीनरी और श्रमिकों की संख्या कम है, जिससे साफ प्रतीत होता है कि निर्माण एजेंसियां समयसीमा को लेकर गंभीर नहीं हैं। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद यदि नई बनी संरचनाएं इतनी जल्दी कमजोर पडऩे लगे।

यह केवल तकनीकी कमी नहीं बल्कि निर्माण कार्य की निगरानी और जवाबदेही पर भी बड़ा प्रश्न चिह्न है। आरोप हैं कि कई स्थानों पर मानकों से समझौता कर कार्य किया गया, जिसका खामियाजा अब लोगों को भुगतना पड़ सकता है। यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो बरसात के दौरान भू-स्खलन व सडक़ धंसने से इनकार नहीं किया जा सकता। सबसे बड़ा सवाल फोरलेन की गुणवत्ता को लेकर है, जिन रिटेनिंग वॉल का उद्देश्य पहाड़ों से होने वाले भू-स्खलन को रोकना और सडक़ को सुरक्षित बनाना था, वही डंगे बरसात से पहले जवाब देते नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में इस प्रकार के निर्माण में मजबूत ड्रेनेज सिस्टम, उच्च गुणवत्ता सामग्री और तकनीकी मानकों का कड़ाई से पालन बेहद जरूरी होता है। डंगों के निर्माण में गुणवत्ता से ज्यादा खानापूर्ति पर ध्यान दिया गया।
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