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भू-अधिग्रहण फैक्टर पर हिमाचल सरकार को राहत

Shantanu Roy
6 Aug 2025 3:27 PM IST
भू-अधिग्रहण फैक्टर पर हिमाचल सरकार को राहत
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Shimla. शिमला। भूमि अधिग्रहण के फैक्टर पर हिमाचल सरकार को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की याचिका पर हिमाचल हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है और सभी पक्षों को नोटिस जारी किए गए हैं। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एमएम सुंदरेष और जस्टिस एनके सिंह की खंडपीठ ने दिया है। हिमाचल हाई कोर्ट ने जून 2025 में दिए फैसले में राज्य सरकार की उस अधिसूचना को खारिज कर दिया था, जिसमें भूमि अधिग्रहण मुआवजा देने के लिए फैक्टर-वन लगाया गया था। इससे अपनी जमीन गंवाने वाले प्रभावितों को दोगुनी कीमत मिलनी थी, जबकि एक्ट के प्रावधान के अनुसार फैक्टर-टू तक राज्य सरकार लगा सकती थी, जिससे चार गुना मुआवजा सुनिश्चित होना था। सुन्नी डैम प्रभावितों के केस में न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने ये आदेश दिए थे। राज्य सरकार ने यह अधिसूचना पहली अप्रैल, 2015 को जारी की थी। इसमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण मुआवजे में फैक्टर-वन लगाने को कहा था।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि राइट-टू- फेयर कंपनसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी इन लैंड एक्विजिशन रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटेलमेंट एक्ट, 2013 की मूल भावना के खिलाफ राज्य सरकार ने नोटिफिकेशन की थी। ग्रामीण क्षेत्र और शहरी क्षेत्र को भूमि अधिग्रहण मुआवजे में एक नहीं माना जा सकता, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि की कीमत कम होती है। अपने फैसले में खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार की अधिसूचना से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों से अन्याय हो रहा है। इसलिए इस अधिसूचना को रद्द किया किया जाता है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को याचिकाकर्ताओं को फेक्टर-2 के हिसाब से 30 सितंबर, 2025 से पहले सभी जरूरी लाभ जारी करने को कहा था। राज्य सरकार की ओर से राजस्व विभाग ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इसमें हिमाचल सरकार के अलावा अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व और अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा पार्टी हैं। सुप्रीम कोर्ट में भूमि प्रभावितों की ओर से केशवराम, जगन्नाथ, लक्ष्मण दास, करमचंद, बृजलाल, किशोर कुमार, गिरधारी लाल, शीला देवी, डाबर राम वर्मा, हेमा राम प्रतिवादी हैं। सतलुज जल विद्युत निगम और लैंड एक्विजिशन कलेक्टर को भी इसमें शामिल किया गया है। केस की सुनवाई अब सितंबर महीने में होने की संभावना है।
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