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Railway Budget 2026: केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने ली प्रेसवार्ता
Shantanu Roy
2 Feb 2026 6:30 PM IST

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New Delhi. नई दिल्ली। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यवार रेल बजट की जानकारी देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में रेलवे कनेक्टिविटी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल ऐसा राज्य है, जहां आम जनजीवन और अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर रेल परिवहन पर निर्भर है, इसलिए यहां बुनियादी ढांचे के विकास और नई परियोजनाओं के लिए रिकॉर्ड बजट आवंटन किया गया है। रेल मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत डिमांड फॉर ग्रांट्स के तहत राज्य-दर-राज्य रेलवे निवेश का विस्तृत खाका तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाना है, बल्कि औद्योगिक, व्यापारिक और सामरिक दृष्टि से भी रेलवे नेटवर्क को मजबूत करना है।
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असम और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए बड़ा बजट
सबसे पहले असम और पूर्वोत्तर राज्यों की बात करते हुए रेल मंत्री ने बताया कि वर्ष 2026 के लिए इस क्षेत्र को 11,486 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वर्तमान में पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में लगभग 72,468 करोड़ रुपये की रेलवे परियोजनाएं विभिन्न चरणों में चल रही हैं। इन परियोजनाओं में नई रेल लाइनों का निर्माण, पुराने ट्रैक का दोहरीकरण, ब्रिज और टनल जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य शामिल हैं। इसके अलावा, कई नए प्रोजेक्ट्स और पुलों के लिए सर्वे भी जारी हैं। भूटान को बेहतर रेल कनेक्टिविटी देने के उद्देश्य से कोकराझार से गेलेफू तक रेल लाइन की योजना पर भी काम चल रहा है।
पूर्वोत्तर में कनेक्टिविटी को नई दिशा
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पूर्वोत्तर राज्यों में रेलवे कनेक्टिविटी को लेकर ऐतिहासिक प्रगति हुई है। हाल ही में मिज़ोरम की रेल कनेक्टिविटी पूरी हो चुकी है, जिससे राज्य को पहली बार सीधे रेलवे नेटवर्क से जोड़ा गया। उन्होंने बताया कि मणिपुर में कुछ समय के लिए काम बाधित हुआ था, लेकिन अब वहां फिर से तेजी से निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। नागालैंड में रेलवे परियोजनाओं पर काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, जबकि अरुणाचल प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना की डीपीआर तैयार हो चुकी है और वह अनुमोदन की उन्नत अवस्था में है। सिक्किम में भी रेलवे का काम संतोषजनक गति से प्रगति पर है। इसके अलावा, लगभग 40 किलोमीटर लंबे एक रणनीतिक सेक्शन के लिए विशेष योजना बनाई गई है, जो पूर्वोत्तर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ेगा। इस सेक्शन में चार रेल लाइनों के साथ-साथ कुछ हिस्सों में अंडरग्राउंड लाइन की भी योजना है। इससे न केवल यात्री परिवहन आसान होगा, बल्कि सामरिक और आर्थिक दृष्टि से भी यह क्षेत्र मजबूत होगा।
पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीक
रेल मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘पूर्वोदय’ विजन के तहत पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी कड़ी में गुवाहाटी से कोलकाता के बीच पहली वंदे स्लीपर ट्रेन की शुरुआत की गई है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी रेलवे द्वारा कई अभिनव कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि हाथियों की सुरक्षा के लिए ऑप्टिकल फाइबर आधारित इंट्रूजन डिटेक्शन टेक्नोलॉजी पहले ही लागू की जा चुकी है। अब एक नया प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जिसमें एआई आधारित कैमरे और थर्मल कैमरा तकनीक के जरिए हाथियों की समय रहते पहचान कर दुर्घटनाओं को रोका जाएगा।
पश्चिम बंगाल के लिए ऐतिहासिक घोषणाएं
पश्चिम बंगाल को लेकर रेल मंत्री ने कई बड़ी घोषणाएं कीं। उन्होंने बताया कि राज्य के लिए 14,205 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बजट आवंटित किया गया है, जो अब तक का सबसे बड़ा रेल बजट है। यह इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल में रेलवे कनेक्टिविटी को लेकर गंभीर और प्रतिबद्ध है। सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि देश की पहली बुलेट ट्रेन पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक आएगी। यह बुलेट ट्रेन कॉरिडोर वाराणसी से सिलीगुड़ी तक प्रस्तावित है, जिसे भविष्य में गुवाहाटी तक बढ़ाने की योजना है। इससे न केवल उत्तर बंगाल बल्कि पूरे पूर्वोत्तर को देश के प्रमुख हिस्सों से हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल को एक नया फ्रेट कॉरिडोर भी मिलेगा। यह कॉरिडोर दानकुनी से गुजरात तक जाएगा और ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों को जोड़ेगा। इससे माल परिवहन तेज़ होगा और उद्योगों को बड़ा लाभ मिलेगा।
कोलकाता मेट्रो का अभूतपूर्व विस्तार
कोलकाता मेट्रो को लेकर भी रेल मंत्री ने अहम आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि मेट्रो के पहले 40 वर्षों में केवल 27 किलोमीटर का नेटवर्क तैयार हो पाया था। लेकिन वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष ध्यान से पिछले 11 वर्षों में 45 किलोमीटर मेट्रो लाइन का निर्माण किया गया है।
तुलना साफ है-
40 साल में 27 किमी
11 साल में 45 किमी
यह पश्चिम बंगाल की शहरी कनेक्टिविटी में एक बड़ा सुधार है। हालांकि, रेल मंत्री ने यह भी कहा कि यदि राज्य सरकार की ओर से सहयोग और बेहतर होता, तो यह काम और तेज़ी से आगे बढ़ सकता था। फिलहाल 17 नए मेट्रो और रेलवे प्रोजेक्ट्स शुरू करने की भी पहल की गई है।
नई ट्रेनें और भविष्य की योजना
रेल मंत्री ने बताया कि हाल के वर्षों में पश्चिम बंगाल में एक दर्जन से अधिक नई ट्रेनों की शुरुआत की गई है। इसके अलावा, पिछले 10 वर्षों में राज्य में 100 से अधिक नई ट्रेनें शुरू हो चुकी हैं। इससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं, अधिक विकल्प और तेज़ यात्रा का लाभ मिला है। अंत में उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में रेलवे नेटवर्क के विस्तार के जरिए न केवल यात्री सुविधाएं मजबूत होंगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास, रोजगार और राष्ट्रीय एकता को भी नई मजबूती मिलेगी।
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