
यूपी। हमीरपुर में मौहर ग्राम प्रधान के फेसबुक अकाउंट से वायरल हुई एक बेहद संवेदनशील और भड़काऊ पोस्ट ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। इस पोस्ट में एक ग्राम पंचायत सदस्य और उनके बेटे की तस्वीर लगाई गई है। दोनों का सिर काटकर लाने वाले को एक लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की गई है। इस घटना ने स्थानीय राजनीति और सामाजिक माहौल में गंभीर तनाव पैदा कर दिया है। इसे आने वाले पंचायत चुनाव से भी जोड़ कर देखा जा रहा है।
इस विवाद की जड़ मनरेगा योजना में हुए कथित भ्रष्टाचार की शिकायत है। ग्राम पंचायत सदस्य विनोद कुमार तिवारी इस विवादित पोस्ट के शिकार हुए हैं। उन्होंने कुछ समय पहले मनरेगा योजना के तहत ग्राम पंचायत में हुए भ्रष्टाचार की शिकायत की थी। विनोद तिवारी का सीधा आरोप है कि ग्राम प्रधान राममिलन निषाद ने उनकी इस शिकायत से नाराज होकर ही उन्हें धमकाने और डराने के उद्देश्य से यह हत्या के लिए उकसाने वाली पोस्ट अपने फेसबुक अकाउंट से डाली है। इस पोस्ट के सामने आते ही पीड़ित परिवार और गांव में डर और दहशत का माहौल बन गया है।
यह पोस्ट तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुई है। इसने न केवल स्थानीय पुलिस-प्रशासन, बल्कि गांव के लोगों को भी सकते में डाल दिया। पोस्ट में जिस तरह की हिंसा और इनाम की घोषणा की गई थी, वह सीधे तौर पर कानून को चुनौती देने और हत्या के लिए प्रेरित करने जैसा गंभीर अपराध है। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए पीड़ित विनोद कुमार तिवारी ने तत्काल इस मामले की लिखित शिकायत स्थानीय पुलिस थाने के साथ-साथ साइबर थाने में भी दर्ज कराई है। उन्होंने मांग की है कि इस घिनौनी हरकत के लिए जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
मामले के केंद्र में आए ग्राम प्रधान राममिलन निषाद ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। प्रधान राममिलन निषाद का कहना है कि उन्होंने ऐसी कोई पोस्ट नहीं डाली है। उनका तर्क है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनका फेसबुक अकाउंट हैक कर लिया और उन्हें बदनाम करने तथा राजनीतिक प्रतिशोध लेने के उद्देश्य से यह विवादित पोस्ट वायरल कर दी। प्रधान ने स्वयं मांग की है कि इस पूरे मामले की गहन जांच होनी चाहिए ताकि सत्य सामने आ सके। दूसरी ओर, इस मामले को लेकर थानाध्यक्ष अनूप सिंह ने बताया कि प्रकरण उनके संज्ञान में नहीं है और न ही अभी तक उन्हें पीड़ित पक्ष की ओर से कोई तहरीर (शिकायत) प्राप्त हुई है। यह बयान पुलिस की शुरुआती तत्परता पर सवाल खड़े करता है, खासकर तब, जब मामला इतना गंभीर और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हो चुका है।





