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बीबीएन। हिमाचल में दवा निर्माण में गुणवत्ता मानकों से समझौता करने वाले उद्योगों के खिलाफ नियामक एजेंसियों की सख्ती लगातार और निर्णायक रूप लेती जा रही है। निर्धारित दवा निर्माण नियमों और गुणवत्ता मानकों की अनदेखी पाए जाने पर प्रदेश के 30 से अधिक दवा उद्योगों में उत्पादन पूरी तरह ठप कर दिया गया है। यह कार्रवाई राज्य दवा नियंत्रक प्राधिकरण और सीडीएससीओ द्वारा दिसंबर 2022 से शुरू रिस्क बेस्ड इंस्पेक्शन (आरबीआई) व्यवस्था के तहत की गई है, जिसे दवा निर्माण में लापरवाही रोकने के उद्देश्य से नियमित निगरानी प्रणाली के रूप में लागू किया गया था।
दिसंबर 2022 से अक्तूबर 2025 तक राज्य दवा नियंत्रक प्राधिकरण और सीडीएससीओ की संयुक्त टीमों द्वारा प्रदेश के करीब 150 दवा निर्माण उद्योगों का निरीक्षण किया जा चुका है। इन निरीक्षणों के दौरान गंभीर तकनीकी और गुणवत्ता संबंधी खामियां सामने आने पर 30 से अधिक इकाइयों में उत्पादन पूरी तरह बंद करने के आदेश जारी करने पड़े, जबकि 35 अन्य उद्योगों में कुछ विशेष उत्पादों या उत्पादन लाइनों पर आंशिक रूप से रोक लगाई गई है। चिंताजनक तथ्य यह है कि जिन इकाइयों पर पूर्ण रूप से स्टॉप मैन्युफैक्चरिंग के आदेश लागू किए गए थे। चालू वर्ष में ही लगभग 70 दवा निर्माण इकाइयों का निरीक्षण किया गया, जिनमें से 30 से अधिक इकाइयों में गुणवत्ता मानकों के गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर उत्पादन बंद करने के आदेश जारी करने पड़े।
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