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राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ करेंगे अहम द्विपक्षीय वार्ता
Delhi दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद पहुंचे। अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के साथ विकास और सहयोग के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत और उज्बेकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों को नई गति देने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों देश आर्थिक विकास, व्यापार, निवेश, शिक्षा, तकनीक और क्षेत्रीय सहयोग समेत कई क्षेत्रों में आपसी साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
Tashkent, Uzbekistan: Prime Minister Narendra Modi arrives in Tashkent. During his visit, he will hold delegation-level talks with President Shavkat Mirziyoyev, advancing the shared developmental visions of Viksit Bharat 2047 and Uzbekistan-2030.
— IANS (@ians_india) August 29, 2026
(Source: PMO) pic.twitter.com/a7jkU1dRuu
वार्ता के दौरान भारत के ‘विकसित भारत@2047’ के विकास दृष्टिकोण और उज्बेकिस्तान के ‘उज्बेकिस्तान-2030’ विजन के बीच साझा प्राथमिकताओं पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। दोनों देशों के विकास लक्ष्यों में आर्थिक प्रगति, आधुनिक बुनियादी ढांचे और नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार जैसे विषय प्रमुख हैं।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के बीच होने वाली बातचीत में द्विपक्षीय सहयोग के मौजूदा क्षेत्रों की समीक्षा के साथ भविष्य की साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा हो सकती है। मध्य एशिया में भारत की सक्रिय भागीदारी और उज्बेकिस्तान के साथ रणनीतिक संबंधों को मजबूत करना भी यात्रा का महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री की ताशकंद यात्रा को भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ से अलग मध्य एशिया पर केंद्रित कूटनीतिक पहुंच के संदर्भ में भी अहम माना जाता है। उज्बेकिस्तान मध्य एशिया में भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार है और दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंध भी रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद दोनों पक्ष सहयोग के नए क्षेत्रों को लेकर आगे की दिशा तय कर सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों में नई ऊर्जा आने और साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की उम्मीद है।
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