भारत
दौड़ते-दौड़ते थम गई प्रशांत की सांसें, अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहा था युवक
Shantanu Roy
16 Aug 2025 9:11 PM IST

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परिजन सदमें में
Bijnor. बिजनौर। जिले के किरतपुर क्षेत्र से शुक्रवार की सुबह एक ऐसी दर्दनाक खबर सामने आई, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। हैवतपुर गांव निवासी 20 वर्षीय प्रशांत चौधरी पुत्र कल्याण सिंह की अचानक दौड़ते समय मौत हो गई। प्रशांत भारतीय सेना में शामिल होने का सपना लेकर तैयारी कर रहा था और उसने अग्निवीर की लिखित परीक्षा पास कर ली थी। दस दिन बाद यानी 25 अगस्त को उसका फिजिकल टेस्ट होना था। उसी की तैयारी के लिए वह रोजाना की तरह सुबह दौड़ने निकला था। लेकिन किसे पता था कि उसके जीवन की अंतिम दौड़ साबित होगी।
दौड़ के दौरान अचानक बिगड़ी तबीयत
शुक्रवार की सुबह प्रशांत चौधरी गांव की सड़क पर दौड़ लगाने गया था। साथ में उसके कुछ दोस्त भी रेस की प्रैक्टिस कर रहे थे। दौड़ते-दौड़ते अचानक उसे सीने में तेज दर्द महसूस हुआ और वह वहीं गिरकर बेहोश हो गया। दोस्तों ने पहले तो पानी पिलाकर और हिलाकर होश में लाने की कोशिश की, लेकिन जब हालत गंभीर दिखी तो तत्काल पास के निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने जांच करने के बाद प्रशांत को मृत घोषित कर दिया।
परिवार में मचा कोहराम
प्रशांत चौधरी की मौत की खबर मिलते ही गांव और परिवार में मातम पसर गया। तीन बहनों का इकलौता भाई प्रशांत परिवार का सबसे लाड़ला सदस्य था। उसकी तीनों बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है, लेकिन भाई की मौत की खबर सुनते ही वे बदहवास हो गईं। बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। माता-पिता भी इस सदमे को सहन नहीं कर पा रहे हैं।
15 अगस्त को जन्म, 15 अगस्त को विदाई
इस घटना की सबसे हृदयविदारक सच्चाई यह है कि प्रशांत चौधरी का जन्म 15 अगस्त को हुआ था और ठीक 20 साल बाद, स्वतंत्रता दिवस के दिन ही उसकी मौत हो गई। जिस दिन देश आजादी का जश्न मना रहा था, उसी दिन एक परिवार ने अपने सपनों का चिराग खो दिया। गांव के लोग कह रहे हैं कि किस्मत का यह खेल किसी को भी स्वीकार्य नहीं है।
सेना में भर्ती का सपना अधूरा रह गया
प्रशांत के परिजनों ने बताया कि वह बचपन से ही सेना में भर्ती होने का सपना देखता था। पढ़ाई में भी अच्छा था और मेहनती स्वभाव का था। हाल ही में उसने अग्निवीर भर्ती की लिखित परीक्षा पास की थी। अब केवल फिजिकल टेस्ट बचा था, जिसके लिए वह कड़ी मेहनत कर रहा था। परिजनों ने कहा कि "प्रशांत रोजाना सुबह-शाम दौड़ की प्रैक्टिस करता था। उसकी मेहनत देखकर हमें भरोसा था कि वह सेना में जरूर जाएगा। लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था।"
दोस्तों ने बताया आखिरी लम्हों का हाल
प्रशांत के दोस्तों ने बताया कि शुक्रवार सुबह जब वह दौड़ रहा था तो अचानक उसका चेहरा पीला पड़ गया। उसने सीने पर हाथ रखा और धड़ाम से गिर पड़ा। शुरुआत में लगा कि शायद थकान की वजह से बेहोश हुआ है, लेकिन जब वह लंबे समय तक नहीं उठा तो सभी घबरा गए। दौड़ते-भागते उसे नजदीकी अस्पताल लेकर गए, लेकिन वहां डॉक्टरों ने मौत की पुष्टि कर दी।
गांव में पसरा सन्नाटा
हैवतपुर गांव में प्रशांत चौधरी की मौत से शोक का माहौल है। गांव के लोग बताते हैं कि प्रशांत मिलनसार और खुशमिजाज लड़का था। हर किसी की मदद करने को हमेशा आगे रहता था। उसकी मौत की खबर फैलते ही सैकड़ों ग्रामीण उसके घर पर पहुंच गए। लोग परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे लेकिन हर किसी की आंखें नम थीं। प्रशांत चौधरी परिवार का इकलौता बेटा था। पिता कल्याण सिंह खेती-किसानी करते हैं। माता-पिता और बहनों ने हमेशा उसे सेना में जाने के लिए प्रेरित किया था। परिवार को उम्मीद थी कि प्रशांत सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करेगा। लेकिन अचानक आई इस दुर्घटना ने सारे सपनों को तोड़ दिया।
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