छत्तीसगढ़

विष्णुदेव साय कैबिनेट विस्तार एक-दो दिन में, गजेंद्र यादव का नाम तय!

Shantanu Roy
16 Aug 2025 8:29 PM IST
विष्णुदेव साय कैबिनेट विस्तार एक-दो दिन में, गजेंद्र यादव का नाम तय!
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Raipur. रायपुर। आखिरकार छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय कैबिनेट के बहुप्रतीक्षित विस्तार का समय आ गया है। लंबे इंतजार और लगातार चल रही अटकलों के बीच अब मुख्यमंत्री के राजभवन पहुंचने के बाद इस पर मुहर लग गई है कि अगले दो-एक दिनों में मंत्रिमंडल विस्तार होना तय है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 18 अगस्त को ही यह बहुप्रतीक्षित विस्तार हो सकता है। बीते दो दिनों से राजधानी रायपुर से लेकर दिल्ली तक मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर खबरें गर्म थीं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज सुबह मीडिया से बातचीत में साफ संकेत दे दिए कि अब किसी भी दिन मंत्रिमंडल विस्तार होगा। इसके कुछ घंटों बाद ही वे राज्यपाल रामेन डेका से मिलने राजभवन पहुंच गए। इसे इस बात के पुख्ता संकेत के तौर पर देखा जा रहा है कि अब सारी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। मंत्रिमंडल विस्तार में जिन नामों की सबसे अधिक चर्चा हो रही है, उनमें गजेंद्र यादव का नाम सबसे ऊपर है। सूत्रों के अनुसार उनके नाम पर किसी तरह का संशय नहीं है।


राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि गजेंद्र यादव का मंत्री बनना तय है। दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा यादव समुदाय को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। गजेंद्र यादव न केवल इस दृष्टि से एक महत्वपूर्ण चेहरा हैं, बल्कि उनकी पृष्ठभूमि संघ परिवार से जुड़ी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से संघ की तारीफ की थी, ऐसे में गजेंद्र यादव को मंत्री बनाए जाने का निर्णय पूरी तरह से संगठनात्मक और राजनीतिक दृष्टिकोण से उपयुक्त माना जा रहा है। गजेंद्र यादव को मंत्री बनाए जाने से भाजपा को दोहरी मजबूती मिलेगी। एक ओर वे संगठन और संघ से गहराई से जुड़े हैं, दूसरी ओर वे यादव वोट बैंक में सेंध लगाने की क्षमता रखते हैं। इसलिए इस नाम पर न कोई किंतु-परंतु है और न ही किसी प्रकार का विरोध।

अन्य संभावित चेहरे – अमर अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, संपत अग्रवाल, लता उसेंडी और गुरू खुशवंत साहेब
गजेंद्र यादव के अलावा और दो मंत्रियों को शपथ दिलाए जाने की संभावना जताई जा रही है। पार्टी रणनीतिकार इस बार क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने की कोशिश में हैं।
अमर अग्रवाल – बिलासपुर से चार बार विधायक रह चुके और पूर्व में स्वास्थ्य मंत्री रहे अमर अग्रवाल संगठन और प्रशासनिक अनुभव दोनों में माहिर माने जाते हैं। लंबे समय से वे मंत्रीमंडल से बाहर हैं, ऐसे में उन्हें शामिल किए जाने की संभावना प्रबल मानी जा रही है।
राजेश अग्रवाल – अंबिकापुर से विधायक, संगठन के पुराने कार्यकर्ता और केंद्रीय नेतृत्व के करीबी माने जाते हैं। अगर उन्हें मौका मिलता है तो सरगुजा संभाग में भाजपा की पकड़ और मजबूत होगी।
संपत अग्रवाल – व्यापारी वर्ग और संगठन के लिए काम करने वाले संपत अग्रवाल का नाम भी प्रबल दावेदारों में है। अगर अमर या राजेश को शामिल नहीं किया गया तो संपत को मंत्री बनाने पर विचार हो सकता है।
लता उसेंडी – आदिवासी महिला विधायक के तौर पर उनकी दावेदारी काफी मजबूत है। भाजपा हमेशा से महिला और आदिवासी प्रतिनिधित्व को लेकर सजग रही है। संगठन के भीतर भी उन्हें काफी समर्थन मिल रहा है।
गुरू खुशवंत साहेब – अनुसूचित जाति वर्ग के विधायक होने के नाते उनकी दावेदारी पर भी गंभीरता से विचार हो रहा है। भाजपा चाहती है कि एससी वोट बैंक को साधने के लिए उन्हें मंत्रीमंडल में जगह दी जाए।
इन पांच नामों में से किसी एक या दो को मंत्री बनाए जाने की संभावना है।

क्षेत्रीय और जातीय संतुलन बड़ी चुनौती
मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे बड़ी चुनौती क्षेत्रीय संतुलन की है। इस समय सरगुजा संभाग से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत तीन मंत्री हैं – रामविचार नेताम, श्याम बिहारी जायसवाल और लक्ष्मी राजवाड़े। अगर राजेश अग्रवाल को मंत्री बनाया जाता है तो सरगुजा से मंत्रियों की संख्या चार हो जाएगी। इससे क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ सकता है। इसी कारण पार्टी रणनीतिकारों के सामने यह दुविधा है कि राजेश अग्रवाल को शामिल किया जाए या फिर अन्य किसी संभाग से चेहरा लाया जाए। वहीं जातीय समीकरण की बात करें तो यादव, अग्रवाल, आदिवासी और अनुसूचित जाति समाज को साधना भाजपा के लिए जरूरी है। इसी लिहाज से गजेंद्र यादव के नाम को तय माना जा रहा है और बाकी चयन इस संतुलन को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

संगठन और दिल्ली की सहमति के बाद बना रास्ता
जानकार बताते हैं कि पिछले कुछ महीनों से भाजपा संगठन और दिल्ली नेतृत्व के बीच मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर गहन मंथन चल रहा था। भाजपा नेतृत्व यह चाहता था कि विस्तार के जरिए संगठन को भी संदेश मिले और आगामी चुनावों के मद्देनजर सामाजिक समीकरण भी साधे जाएं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय लगातार दिल्ली जाकर आलाकमान से मिलते रहे। वहीं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के साथ भी कई दौर की बैठकें हुईं। इसी सिलसिले में अब जाकर सहमति बनी है और विस्तार का रास्ता साफ हुआ है।

राजनीतिक महत्व – 2029 लोकसभा और आगामी विधानसभा चुनाव पर नजर
भाजपा के लिए यह विस्तार केवल मंत्रियों की संख्या बढ़ाने का मामला नहीं है, बल्कि इसके जरिए पार्टी अगले लोकसभा और विधानसभा चुनावों की रणनीति भी तय कर रही है। बिहार में यादव वोट बैंक साधने के लिए गजेंद्र यादव का मंत्री बनना अहम कदम होगा। छत्तीसगढ़ में अग्रवाल, आदिवासी और अनुसूचित जाति समाज को प्रतिनिधित्व देकर भाजपा अपने वोट बैंक को मजबूत करना चाहती है। महिला प्रतिनिधित्व के जरिए पार्टी महिला मतदाताओं को भी साधने का प्रयास करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा का यह कदम स्पष्ट रूप से आने वाले चुनावों के मद्देनजर है।

कैबिनेट विस्तार की उलटी गिनती
एनपीजी न्यूज से बातचीत में उच्च पदस्थ सूत्रों ने भी इस बात की तस्दीक की है कि अब मंत्रिमंडल विस्तार में कोई अड़चन नहीं है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज खुद मीडिया के सामने संकेत दे दिए हैं। राजनीतिक गलियारों में अब उलटी गिनती शुरू हो गई है। संभावना यही है कि 18 अगस्त को राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह होगा।
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