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संगरिया में पार्षदों को लेकर सियासी घमासान, थाने के बाहर कांग्रेस का धरना

Shantanu Roy
19 Sept 2026 4:43 PM IST
संगरिया में पार्षदों को लेकर सियासी घमासान, थाने के बाहर कांग्रेस का धरना
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Hanumangarh. हनुमानगढ़। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की संगरिया नगरपालिका में अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले सियासी खींचतान तेज हो गई है। नवनिर्वाचित पार्षद ओमप्रकाश स्वामी और साहिल स्वामी से जुड़े कथित अपहरण के मामले की जांच के लिए संगरिया पुलिस पंजाब पहुंची। वहां दोनों पार्षद कांग्रेस खेमे के साथ मौजूद मिले। पुलिस कार्रवाई को लेकर संगरिया विधायक अभिमन्यु पूनिया और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने संगरिया थाने के बाहर धरना देकर विरोध दर्ज कराया। मामला नगरपालिका अध्यक्ष पद के चुनाव से ठीक पहले सामने आने के कारण राजनीतिक रूप से भी अहम हो गया है। कांग्रेस पुलिस कार्रवाई को राजनीतिक दबाव से जोड़ रही है, जबकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पुलिस कथित अपहरण से संबंधित शिकायत की जांच के सिलसिले में पंजाब गई थी। दोनों पार्षदों ने पुलिस के सामने अपहरण से इनकार करते हुए अपनी इच्छा से पंजाब में मौजूद होने की बात कही है।

पार्षदों की तलाश में पंजाब पहुंची पुलिस
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पार्षद पिता-पुत्र से जुड़े कथित अपहरण के मामले की जांच के लिए संगरिया थाने के एसआई हरबंसलाल और एएसआई रणवीर सिंह की टीम पंजाब पुलिस के साथ पटियाला पहुंची थी। यहां दोनों पार्षद जिस स्थान पर ठहरे हुए थे, वहां संगरिया विधायक अभिमन्यु पूनिया भी मौजूद थे। पुलिस टीम के पहुंचने के बाद मौके पर माहौल गरमा गया। विधायक और पुलिस अधिकारियों के बीच कार्रवाई को लेकर तीखी बहस हुई। इस घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि पुलिस पार्षदों पर दबाव डालने के उद्देश्य से वहां पहुंची थी। वहीं पुलिस कार्रवाई को दर्ज शिकायत की जांच का हिस्सा बताया जा रहा है।

पार्षदों ने अपहरण से किया इनकार
पुलिस ने ओमप्रकाश स्वामी और साहिल स्वामी के बयान दर्ज किए। दोनों ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि उनका अपहरण नहीं हुआ है और वे अपनी इच्छा से पंजाब आए हैं। बयान दर्ज करने के बाद पुलिस टीम वापस लौट गई। साहिल स्वामी ने भी राजनीतिक दबाव का आरोप लगाया है। राजस्थान पत्रिका के मुताबिक, उन्होंने कहा कि नगरपालिका अध्यक्ष चुनाव में उन्हें दो वोटों के रूप में देखते हुए दबाव बनाने की कोशिश हो रही है।
संगरिया थाने के बाहर कांग्रेस का धरना
पंजाब में हुए घटनाक्रम के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता संगरिया थाने के बाहर धरने पर बैठ गए। विधायक अभिमन्यु पूनिया भी विरोध में शामिल हुए। कांग्रेस नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता भी विरोध में शामिल हुए। पूनिया ने आरोप लगाया कि सरकार के इशारे पर नवनिर्वाचित पार्षदों पर राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने पुलिस पर पार्षदों को डराने का आरोप भी लगाया। ये आरोप कांग्रेस विधायक के हैं; उपलब्ध रिपोर्टों में पुलिस की कार्रवाई कथित अपहरण की शिकायत की जांच से जुड़ी बताई गई है।

35 सदस्यीय नगरपालिका में 18 का बहुमत जरूरी
इस पूरे विवाद के पीछे संगरिया नगरपालिका अध्यक्ष चुनाव का सियासी गणित भी महत्वपूर्ण है। 35 सदस्यीय नगरपालिका में अध्यक्ष बनाने के लिए 18 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। चुनाव में 25 निर्दलीय, आठ कांग्रेस और दो बीजेपी पार्षद निर्वाचित हुए हैं। ऐसे में किसी भी खेमे के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन निर्णायक भूमिका निभा सकता है। कांग्रेस ने अध्यक्ष पद के लिए सुमन सोनी को अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। अलग-अलग राजनीतिक खेमे अध्यक्ष पद के लिए जरूरी समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं। इसी वजह से चुनाव परिणाम के बाद से पार्षदों की बाड़ेबंदी और राजनीतिक संपर्कों की चर्चा तेज है। अध्यक्ष पद का चुनाव 21 सितंबर को होना है।

पुलिस कार्रवाई पर कांग्रेस के सवाल
विधायक अभिमन्यु पूनिया का कहना है कि निर्वाचित पार्षदों को राजनीतिक दबाव में लाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि ओमप्रकाश स्वामी और साहिल स्वामी अपनी इच्छा से कांग्रेस के साथ हैं और पुलिस कार्रवाई के जरिए उन्हें परेशान किया गया। वहीं, पुलिस की कार्रवाई का आधार कथित अपहरण से संबंधित शिकायत बताई गई है। पुलिस टीम ने दोनों पार्षदों तक पहुंचकर उनके बयान दर्ज किए और उनके अपहरण से इनकार करने के बाद लौट गई। इसलिए मामले में पुलिस कार्रवाई और कांग्रेस के राजनीतिक दबाव संबंधी आरोपों को अलग-अलग पक्षों के रूप में देखना जरूरी है। नगरपालिका अध्यक्ष चुनाव से पहले सामने आए इस घटनाक्रम ने संगरिया की राजनीति को गरमा दिया है। 25 निर्दलीय पार्षद होने के कारण अध्यक्ष पद के लिए समर्थन जुटाना सबसे महत्वपूर्ण पहलू बना हुआ है। अब नजर 21 सितंबर को होने वाले अध्यक्ष चुनाव और उससे पहले बदलते राजनीतिक समीकरणों पर रहेगी।
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