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Hariyana हरियाणा: अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान मंगलवार को कुरुक्षेत्र में आस्था और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम देखने को मिला। पावन ब्रह्म सरोवर पर हजारों श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए उमड़े, वहीं शाम की महाआरती ने पूरे वातावरण को दिव्य और आलौकिक बना दिया। श्रद्धालु और विशिष्ट अतिथि इस आध्यात्मिक आयोजन में शामिल हुए और समस्त देशवासियों के लिए सुख-समृद्धि, शांति और आरोग्यपूर्ण जीवन की कामना की। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव हर साल कुरुक्षेत्र में भव्य रूप से आयोजित होता है। यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि भारतीय दर्शन, संस्कृति और ज्ञान परंपरा की वैश्विक पहचान का प्रतीक भी बन चुका है। इसी कड़ी में मंगलवार को ब्रह्म सरोवर में विशेष पूजा-अर्चना और महाआरती का आयोजन किया गया। प्राचीन ग्रंथों में वर्णित यह सरोवर महाभारत काल से ही पवित्र माना जाता है और ऐसा माना जाता है कि यहां स्नान और पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह श्रद्धालुओं द्वारा ब्रह्म सरोवर में पवित्र जल का स्पर्श करने और भगवान श्री कृष्ण को प्रणाम करने से हुई। इस दौरान वातावरण में गूंज रहे वैदिक मंत्र, शंखनाद और घंटियों की ध्वनि श्रद्धा से भरे माहौल को और भी आध्यात्मिक बना रही थी। विभिन्न राज्यों से आए भक्तों ने गीता पाठ का आनंद लिया और पवित्र स्थल पर ध्यान-योग में भाग लिया। शाम होते ही महाआरती की तैयारी शुरू हुई। सरोवर के चारों ओर दीपों की कतारें सजाई गईं। जैसे ही पुजारियों ने मंत्रोच्चार के साथ महाआरती आरंभ की, हजारों दीपों की रोशनी सरोवर के जल पर प्रतिबिंबित होकर अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करने लगी। चारों ओर “हर हर गंगे” और “जय श्री कृष्ण” के उद्घोष गूंज उठे। उपस्थित श्रद्धालुओं ने आरती में शामिल होकर देश के लिए सुख-समृद्धि और सभी नागरिकों के कल्याण की प्रार्थना की।
कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले विशिष्ट अतिथियों ने कहा कि गीता का संदेश कालातीत है और समाज को धर्म, कर्तव्य और कर्मयोग का मार्ग दिखाता है। ऐसे आयोजनों से न केवल आध्यात्मिकता को बल मिलता है बल्कि जीवन में सकारात्मकता, संतुलन और शांति का भी संचार होता है। हरियाणा सरकार ने इस वर्ष गीता महोत्सव को और अधिक भव्य बनाने के लिए विशेष प्रबंध किए हैं, जिनमें सांस्कृतिक कार्यक्रम, योग सत्र, गीता प्रवचन, अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी और हस्तशिल्प मेले का आयोजन भी शामिल है। हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए थे। पुलिस, स्वयंसेवक और आपदा प्रबंधन टीम लगातार निगरानी में लगे हुए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। कुल मिलाकर, ब्रह्म सरोवर पर आयोजित महाआरती और पूजा-अर्चना ने गीता महोत्सव के इस अध्याय को अविस्मरणीय बना दिया। यह आयोजन न केवल कुरुक्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को पुनर्स्मरण कराता है, बल्कि गीता के संदेशों को आत्मसात करने का भी प्रेरक माध्यम बनता है।
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