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रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। यहां रात में अपने सात वर्षीय बेटे के साथ घर में सो रही महिला की अचानक नींद खुली तो सामने विशालकाय मगरमच्छ देखकर उसके होश उड़ गए। करीब 5 फीट 7 इंच लंबा मगरमच्छ मुंह खोलकर महिला की ओर बढ़ रहा था। खतरे को भांपते हुए महिला ने हिम्मत दिखाई और अपने मासूम बेटे को साथ लेकर घर की छोटी खिड़की से बाहर निकल गई। इसके बाद महिला ने पड़ोसियों को आवाज लगाकर मदद मांगी। सूचना मिलने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद मगरमच्छ को काबू में किया। घटना बुधवार 7 अक्टूबर की रात करीब 10 बजे की बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, यह घटना रतलाम जिले के बाजना जनपद क्षेत्र में ग्राम कुंदनपुर के समीप स्थित नवागांव की है। यहां रहने वाली सीताबाई डोडियार अपने छोटे बेटे के साथ घर में सो रही थीं। इसी दौरान अचानक उनकी नींद खुल गई। सामने एक विशाल मगरमच्छ दिखाई दिया, जो मुंह खोलकर उनकी ओर बढ़ रहा था। मगरमच्छ घर के दरवाजे से करीब तीन फीट की दूरी पर मौजूद था। ऐसी स्थिति में महिला के सामने खुद और अपने बेटे की जान बचाने की चुनौती थी।
सीताबाई ने घबराने के बावजूद समझदारी दिखाई। उन्होंने तुरंत अपने सात वर्षीय बेटे को साथ लिया और घर की छोटी खिड़की से बाहर निकल गईं। बाहर पहुंचने के बाद उन्होंने आसपास रहने वाले लोगों को आवाज लगाई। महिला की आवाज सुनकर पड़ोसी और अन्य ग्रामीण मौके पर पहुंचे। घर के भीतर मगरमच्छ दिखाई देने से ग्रामीण भी हैरान रह गए।
बताया गया कि सीताबाई मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करती हैं। उनके पति केसु डोडियार का करीब सात वर्ष पहले निधन हो गया था। परिवार में उनके दो बेटे हैं। छोटे बेटे की उम्र सात वर्ष और बड़े बेटे की उम्र 12 वर्ष है। घटना के समय बड़ा बेटा अपने दोस्तों के साथ नदी की ओर गया हुआ था, जबकि सीताबाई छोटे बेटे के साथ घर में मौजूद थीं।
घटना के समय घर का दरवाजा खुला हुआ था। आशंका जताई जा रही है कि मगरमच्छ इसी रास्ते से घर के भीतर पहुंचा होगा। हालांकि, मगरमच्छ के गांव और घर तक पहुंचने के वास्तविक रास्ते की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
महिला और उसके बेटे के सुरक्षित बाहर निकलने के बाद ग्रामीणों ने मगरमच्छ को पकड़ने का प्रयास शुरू किया। विशाल मगरमच्छ को काबू में करना आसान नहीं था। ग्रामीणों ने काफी प्रयास के बाद उसे रस्सियों की सहायता से बांध दिया। इस दौरान सभी लोग सावधानी बरतते रहे, क्योंकि मगरमच्छ के हमले से गंभीर चोट पहुंचने का खतरा था।
ग्रामीणों के अनुसार, घटना की जानकारी रात करीब 10 बजे पुलिस को दी गई थी, लेकिन उस समय पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। ग्रामीणों का कहना है कि रात में वन विभाग का कर्मचारी भी वहां नहीं पहुंचा। इसके बाद गांव के लोगों ने स्वयं मगरमच्छ को काबू में किया और उसे एक पिकअप वाहन में रखा।
मगरमच्छ को पकड़ने के बाद ग्रामीण उसे बाजना की ओर लेकर गए, लेकिन वहां संबंधित जिम्मेदार अधिकारी नहीं मिले। इसके बाद ग्रामीण वापस लौट आए। उन्होंने मगरमच्छ को नदी में छोड़ने का भी प्रयास किया, लेकिन नदी के पास पहुंचने पर मगरमच्छ की सक्रियता देखकर ग्रामीणों ने उसे छोड़ने का निर्णय बदल दिया।
इसके बाद मगरमच्छ को वापस गांव लाया गया और निर्माणाधीन महादेव मंदिर के पास रस्सियों से बांधकर रखा गया। गांव के दो से तीन युवकों ने रातभर मगरमच्छ की निगरानी की, ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हो।
गुरुवार सुबह वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मगरमच्छ को अपने कब्जे में लिया। वन विभाग के रेंजर अमित सोनी मगरमच्छ को वन परिक्षेत्र कार्यालय बाजना लेकर पहुंचे। यहां पशु चिकित्सक फिरोज खान ने मगरमच्छ का स्वास्थ्य परीक्षण किया।
परीक्षण के दौरान मगरमच्छ शांत अवस्था में था। उसकी लंबाई लगभग 170 सेंटीमीटर यानी 5 फीट 7 इंच बताई गई। उसकी अनुमानित उम्र करीब दो वर्ष बताई गई है। मगरमच्छ को फिलहाल वन परिक्षेत्र कार्यालय बाजना में पिंजरे में रखा गया है।
घटना के बाद एक बड़ा सवाल यह भी सामने आया है कि मगरमच्छ आखिर गांव तक कैसे पहुंचा। नवागांव से माही डेम की दूरी करीब 20 किलोमीटर है। माही डेम में मीठे पानी के मगरमच्छ पाए जाते हैं। इसके अलावा क्षेत्र की तेलनी नदी भी माही नदी तंत्र से जुड़ी हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में जलस्रोतों का जलस्तर कम होने की स्थिति देखी जा रही है। ऐसे में वन्यजीवों की आबादी वाले क्षेत्रों में आवाजाही को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। हालांकि, संबंधित मगरमच्छ माही डेम या तेलनी नदी से आया था, इसकी पुष्टि वन विभाग ने नहीं की है।
क्षेत्र के लोगों ने तेंदुए की गतिविधियों और जंगली सूअर के गांव के आसपास दिखाई देने की घटनाओं का भी उल्लेख किया है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में वन्यजीवों की मौजूदगी को लेकर सतर्कता बनाए रखने की आवश्यकता है।
इस घटना में राहत की बात यह रही कि सीताबाई और उनका सात वर्षीय बेटा सुरक्षित बच निकले। मगरमच्छ के घर में प्रवेश करने और महिला के बेहद करीब पहुंच जाने के बावजूद किसी के घायल होने की जानकारी नहीं है।
वन्यजीवों से जुड़े जानकारों की सामान्य सलाह है कि मगरमच्छ दिखाई देने पर उससे सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए और तत्काल वन विभाग को सूचना देनी चाहिए। बिना प्रशिक्षण और उचित सुरक्षा उपकरणों के मगरमच्छ को पकड़ने या उसके पास जाने का प्रयास खतरनाक हो सकता है।
रतलाम के नवागांव की इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में वन्यजीवों के प्रवेश और ऐसी परिस्थितियों में तत्काल सहायता की उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल मगरमच्छ वन विभाग की निगरानी में है, जबकि महिला और उसका बेटा सुरक्षित हैं।
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