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कैशियर हत्याकांड में पाकिस्तान लिंक मिला, नार्को-टेरर का खुलासा

Nil dhankar
9 July 2026 7:34 AM IST
कैशियर हत्याकांड में पाकिस्तान लिंक मिला, नार्को-टेरर का खुलासा
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चंडीगढ़। मेडिकल स्टोर के कैशियर की हत्या की जांच ने एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसकी डोर पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स से जुड़ी बताई जा रही है. पुलिस ने पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में छापेमारी कर तीन आरोपियों को पकड़ा है. इनके पास से 3 किलो से ज्यादा ड्रग, 8 लाख के नकली नोट और अत्याधुनिक हथियार बरामद हुए हैं. जांच में सामने आया है कि यही नेटवर्क ड्रोन के जरिए हथियार और नशा भारत भेजकर गैंगस्टरों के जरिए वारदातों को अंजाम दिलाता था.

एजेंसी के अनुसार, पुलिस ने पाकिस्तान से संचालित एक कथित क्रॉस बॉर्डर नार्को-टेरर नेटवर्क का पर्दाफाश करने का दावा किया है. पुलिस ने पंजाब के तरनतारन और अमृतसर में संयुक्त कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया. इनमें आकाश कुमार उर्फ मणि, सचिन सिल्वेस्टर और गुरमीत सिंह उर्फ बादशाह शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक, ये गिरफ्तारियां पिछले महीने चंडीगढ़ के सेक्टर-11 में एक मेडिकल स्टोर के कैशियर की हत्या की जांच के दौरान मिले सुरागों के आधार पर की गईं.

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 3.028 किलोग्राम ICE (मेथामफेटामाइन) ड्रग, 8 लाख के नकली नोट, दो अत्याधुनिक पिस्टल, कई मैगजीन बरामद की हैं. पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ एक हत्या का मामला नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय और सीमा पार संचालित बड़े आपराधिक सिंडिकेट का हिस्सा है. जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड धर्मिंदर सिंह उर्फ गोली है, जो फिलहाल पंजाब की कपूरथला जेल में बंद है. उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी और ड्रग्स तस्करी समेत 32 आपराधिक मामले दर्ज हैं.

पुलिस के अनुसार, गोली पाकिस्तान में बैठे विदेशी हैंडलर्स के इशारों पर काम करता था. वही हथियार, ड्रग्स, नकली नोट और शूटरों की पूरी व्यवस्था कराता था. अब उसे प्रोडक्शन वारंट पर लेकर पूछताछ की जाएगी. पुलिस जांच के मुताबिक, पाकिस्तान में बैठे हैंडलर सीमा पार से लो-फ्लाइंग ड्रोन के जरिए हथियार और नशीले पदार्थ भारतीय सीमा में गिराते थे. इसके बाद पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में मौजूद नेटवर्क इन खेपों को उठाता था. पूरी बातचीत एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए होती थी, ताकि सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचा जा सके. पुलिस का दावा है कि नेटवर्क सिर्फ तस्करी तक सीमित नहीं था. गैंग के सदस्य जम्मू-कश्मीर से शूटर बुलाते थे, उन्हें सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराते थे, तस्करी कर लाए गए हथियारों की टेस्ट फायरिंग करते थे और फिर रेकी कर हत्या जैसी वारदातों को अंजाम दिलाते थे.

13 जून को चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित एक मेडिकल स्टोर में 45 साल के कैशियर जंकी दास की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. दो नकाबपोश बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया था और पूरी घटना दुकान में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई थी. जांच में सामने आया कि आरोपी सनी मेहरा और अमित को गुरमीत सिंह उर्फ बादशाह ने अपने घर में पनाह दी थी. उसने उन्हें पिस्टल, नकदी और अन्य जरूरी मदद भी उपलब्ध कराई थी. चंडीगढ़ पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है. एजेंसियां इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश कर रही हैं. साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बरामद ड्रग्स, नकली नोट और हथियारों की सप्लाई कहां से हुई और इस पूरे नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका रही.


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