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ट्रंप से इस्तेमाल होता रहा पाकिस्तान, युद्ध रुकवाने अब भारत...

Nilmani Pal
22 April 2026 2:39 PM IST
ट्रंप से इस्तेमाल होता रहा पाकिस्तान, युद्ध रुकवाने अब भारत...
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दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच 28 फरवरी से तनाव की स्थिति बनी हुई है। कई दिनों तक हुए हमलों के बाद दोनों देशों के बीच सीजफायर हुआ, लेकिन अभी तक शांति स्थापित नहीं हो सकी है। दोनों देश अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं। पाकिस्तान ने इस मध्यस्थता की कोशिश की है, लेकिन वह अभी तक पूर्ण रूप से सफल नहीं हो सका है। इस सबके बीच भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बर्लिन में एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कल ऐसा समय भी आ सकता है जब भारत अपनी भूमिका निभाए और इसमें सफलता भी हासिल करे।

राजनाथ सिंह के इस बयान के बाद से भारत के द्वारा मध्यस्थता की अटकलें तेज हो गई हैं। ईरान और अमेरिका के रिश्तों परराजनाथ सिंह ने कहा, "भारत ने कोशिश की है, लेकिन हर चीज़ का एक समय होता है। हो सकता है कि कल ऐसा समय आए जब भारत इसमें अपनी भूमिका निभाए और सफलता भी हासिल करे। हम इस संभावना से इनकार नहीं कर सकते। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों पक्षों से युद्ध समाप्त करने की अपील की है। कूटनीतिक मामलों में हमारे प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण बहुत संतुलित है।"

राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यवधान कोई दूर की घटना नहीं बल्कि यह एक कड़वी सच्चाई है जिसका भारत की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर सीधा असर पड़ता है। उन्होंने जर्मनी की तीन दिवसीय यात्रा के पहले दिन रक्षा एवं सुरक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि आज दुनिया नए सुरक्षा खतरों का सामना कर रही है और तकनीकी परिवर्तन ने स्थिति को बेहद जटिल एवं परस्पर संबंधित बना दिया है। बदलते परिवेश के अनुकूल ढलने की तत्परता के साथ एक नए दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

आपको बता दें कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की जर्मनी यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब पश्चिम एशिया में 50 दिनों से अधिक समय से संघर्ष जारी है और इसके वैश्विक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा, "भारत जैसे विकासशील देश के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यवधान कोई दूर की घटना नहीं बल्कि यह एक गंभीर वास्तविकता है, जिसका हमारी सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर सीधा प्रभाव पड़ता है।" उन्होंने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के एक महत्वपूर्ण हिस्से के लिए पश्चिम एशियाई क्षेत्र पर निर्भर है।

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