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धर्मशाला। गेहूं की फसल की कटाई के उपरांत हिमाचल प्रदेश के किसान खरीफ की मुख्य फसल धान की बिजाई की तैयारियों में जुट गए है, लेकिन खेती के इस सबसे महत्त्वपूर्ण समय में सरकारी वितरण केंद्रों पर धान का बीज समाप्त होने से किसानों की चिंताएं बेहद बढ़ गई हैं। शुरुआती चरण में तो केंद्रों पर बीज उपलब्ध रहा, लेकिन वर्तमान में नया स्टॉक न होने के कारण दूरदराज से आ रहे किसानों को खाली हाथ और मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। सीजन की शुरुआत में ही बीज की इस भारी किल्लत ने विभाग की तैयारियों की पोल खोल कर रख दी है।
इस पूरे संकट के पीछे कृषि विभाग और किसानों के बीच सटीक अनुमान न हो पाने को मुख्य वजह माना जा रहा है। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, किसानों द्वारा बीज की मांग का सही अनुमान समय पर विभाग को नहीं भेजा गया था। इसी वजह से विभाग वास्तविक आवश्यकता का अंदाजा नहीं लगा सका और यह गंभीर स्थिति पैदा हो गई। फिलहाल विभाग के पास कोई अतिरिक्त बीज उपलब्ध नहीं है। हिमाचल प्रदेश में आमतौर पर मई से जून के दौरान धान की नर्सरी (पनीरी) तैयार की जाती है, जिसके बाद जून और जुलाई के महीनों में खेतों में रोपाई का मुख्य कार्य शुरू होता है। ऐसे में पनीरी लगाने के इस बेहद नाजुक समय पर बीज न मिलना किसानों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। गांव बैदी के किसान ज्ञानी सिंह व मुल्ख राज और गांव लांझणी के किसान पवन तथा अर्जित ने कहा कि सरकारी केंद्रों पर बीज न मिलने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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