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हिमाचल में एक जिला-तीन उत्पाद से सुधरेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

Shantanu Roy
20 July 2026 3:34 PM IST
हिमाचल में एक जिला-तीन उत्पाद से सुधरेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक और विशिष्ट उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वन डिस्ट्रिक्ट थ्री प्रोडक्ट (ओडीटीपी) कार्यक्रम के तहत प्रदेश के प्रत्येक जिले से तीन-तीन प्रमुख उत्पादों का चयन किया गया है। इन 36 उत्पादों को ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन और विपणन के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अक्तूबर, 2026 में भव्य प्रदर्शनी और रिवर्स बायर-सेलर मीट का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि यह पहल न केवल स्थानीय उत्पादों को नई पहचान दिलाएगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करने में भी अहम भूमिका निभाएगी। राज्य सरकार ने प्रत्येक जिले के ऐसे उत्पादों का चयन किया है, जिनमें आर्थिक संभावनाएं अधिक हैं, बाजार में मांग है और जिनका स्थानीय स्तर पर विशेष महत्व है।
उत्पादों में बिलासपुर से अदरक, रेशम उत्पादन और मत्स्य पालन, चंबा से चंबा चप्पल, सफेद मक्की और ऊन, हमीरपुर से हल्दी, बांस और मक्की, कांगड़ा से कांगड़ा चाय, कांगड़ा लघु चित्रकला और गिलोय, किन्नौर से हिमाचली चुल्ली तेल, किन्नौरी शॉल और चिलगोजा, कुल्लू से ट्राउट मछली, हेम्प ऑयल और कुल्लू टोपी, लाहुल-स्पीति से सी-बकथॉर्न, पुल्ले और हरी मटर, मंडी से सेपू बड़ी, धातु शिल्प तथा पत्थर, लकड़ी की नक्काशी, शिमला से सेब आधारित उत्पाद, स्थानीय शहद, जौ का माल्ट एवं आटा तथा गुच्छी मशरूम, सिरमौर से लहसुन, अदरक, सिरमौरी लोइया, सोलन से मशरूम, टमाटर और औषधि उत्पाद तथा ऊना से आलू, लीची और ड्रैगन फ्रूट शामिल हैं। सरकार ने उत्पादकों को उद्योगों और बड़े खरीदारों से जोडऩे के लिए अब तक तीन विक्रेता विकास कार्यक्रम और पांच रोजगार विकास कार्यक्रम आयोजित किए हैं। अगले चरण में अक्तूबर में होने वाले मेगा आयोजन में उत्पादकों, निर्यातकों, निवेशकों, खुदरा विक्रेताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक ही मंच पर लाया जाएगा। इस रिवर्स बायर-सेलर मीट से व्यापारिक साझेदारियां मजबूत होंगी, स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलेंगे और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलेगी।
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