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23 अप्रैल को ही भारतीय सेना को मिल गई थी पाकिस्तान से बदला लेने की खुली छूट

Nil dhankar
10 Aug 2025 8:00 AM IST
23 अप्रैल को ही भारतीय सेना को मिल गई थी पाकिस्तान से बदला लेने की  खुली छूट
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पहलगाम अटैक के दूसरे दिन रक्षा मंत्री ने ली थी बैठक

दिल्ली। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने खुलासा किया है कि 22 अप्रैल को पहलगाम में जो कुछ हुआ, उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. इसके अगले ही दिन 23 अप्रैल को शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व की अहम बैठक हुई. जनरल द्विवेदी के मुताबिक, यह पहली बार था, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा- बस, अब बहुत हो चुका.

उन्होंने कहा, 23 अप्रैल को हम सभी बैठे. सभी तीनों सेनाओं के प्रमुख इस बात पर सहमत थे कि कुछ बड़ा किया जाना जरूरी है. हमें पूरी तरह खुला हाथ दिया गया- 'आप तय कीजिए कि क्या करना है.' यही वह भरोसा, राजनीतिक दिशा और स्पष्टता थी, जो हमने पहली बार देखी. जनरल द्विवेदी ने कहा कि इस तरह के स्पष्ट राजनीतिक समर्थन से सैनिकों का मनोबल बढ़ता है. यही वजह थी कि हमारे आर्मी कमांडर जमीन पर जाकर अपने विवेक से कदम उठा सके. उन्होंने आगे बताया, 25 अप्रैल को हम नॉर्दर्न कमांड पहुंचे, जहां हमने सोचा, योजना बनाई, कॉन्सेप्ट तैयार किया और उसे अंजाम दिया. 9 में से 7 टारगेट को ध्वस्त किया और बड़ी संख्या में आतंकियों को मार गिराया. 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री से हमारी पहली मुलाकात हुई.

जनरल द्विवेदी ने कहा, यह समझना जरूरी है कि कैसे एक छोटा सा नाम 'ऑपरेशन सिंदूर' पूरे देश को जोड़ देता है. इसने पूरे राष्ट्र को ऊर्जा दी. जब डायरेक्टर ने यह नाम सुझाया तो मैंने सोचा यह 'सिन्धु' है- यानी इंडस नदी और मैंने कहा, 'बहुत बढ़िया, आपने तो इंडस वॉटर ट्रीटी को फ्रीज कर दिया.' उन्होंने कहा- नहीं, यह 'सिंदूर' है. जनरल द्विवेदी ने कहा, इस एक नाम ने पूरे देश को एक कर दिया. आज लोग कह रहे हैं- 'सिन्धु से सिंदूर तक... सब कुछ हमने संभाल लिया.' जब मैं ग्राउंड पर गया तो मैंने सैनिकों से कहा- 'कोई भी बहन, मां या बेटी जब सिंदूर लगाएगी तो वो हमेशा सैनिक को याद करेगी.' यही वो जुड़ाव था जिसने पूरे राष्ट्र को एक उद्देश्य के लिए खड़ा कर दिया. यही कारण था कि पूरा देश पूछ रहा था- 'आपने ऑपरेशन क्यों रोका?' और इसका जवाब भी दिया जा चुका है.'

आईआईटी मद्रास में आयोजित कार्यक्रम में आर्मी चीफ ने 'ऑपरेशन सिंदूर' की शतरंज के खेल से तुलना की और कहा, हम नहीं जानते थे कि दुश्मन का अगला कदम क्या होगा और हमें क्या करना है. इसे ग्रे जोन कहते हैं. ग्रे जोन का मतलब है कि हम पारंपरिक ऑपरेशनों में नहीं जा रहे, बल्कि ऐसे कदम उठा रहे हैं जो उनसे जरा कम स्तर के होते हैं. पारंपरिक ऑपरेशन का मतलब है- पूरी ताकत के साथ जाना, जो कुछ आपके पास है उसका इस्तेमाल करना और अगर आप वापस आ जाएं तो ठीक, वरना वहीं टिक जाना. लेकिन ग्रे जोन वह है जिसमें सभी डोमेन में गतिविधियां चल रही होती हैं. हम बेहद रणनीतिक तरीके से काम कर रहे थे. उन्होंने कहा, हम शतरंज की चाल चल रहे थे और दुश्मन भी अपनी चाल चल रहा था. कहीं हम उसे चेकमेट दे रहे थे और कहीं जान की बाजी लगाकर हमला कर रहे थे. यही ज़िंदगी है.

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