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हरदोई: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सियासत तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री नितिन अग्रवाल ने इस मुद्दे पर विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव हारने के बाद चुनाव आयोग पर सवाल उठाना विपक्ष की पुरानी आदत बन गई है। नितिन अग्रवाल ने कहा कि यह केवल ममता बनर्जी का बयान नहीं है, बल्कि विपक्षी दलों की ओर से लगातार ऐसा रुख देखने को मिलता रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले चार-पांच वर्षों में जिन राज्यों में विपक्ष को चुनावी हार मिली, वहां सबसे पहले चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए गए।
मंत्री ने कहा कि जब विपक्षी दल किसी राज्य में चुनाव जीतते हैं तो वह इसका श्रेय अपनी रणनीति और जनता के समर्थन को देते हैं, लेकिन हार मिलने पर चुनाव आयोग पर आरोप लगाने लगते हैं। उन्होंने इसे दोहरा रवैया बताया। नितिन अग्रवाल ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाने से पहले तथ्यों को सामने रखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार अपनी चुनावी हार का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ने की कोशिश करता है।
उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। लोकतंत्र की मजबूती के लिए संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान जरूरी है। गौरतलब है कि चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठाते रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए। वहीं, सत्तारूढ़ दलों के नेता विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए चुनाव आयोग का बचाव कर रहे हैं।
नितिन अग्रवाल ने कहा कि चुनाव आयोग पर बार-बार आरोप लगाने से लोकतांत्रिक संस्थाओं की छवि प्रभावित होती है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि चुनाव परिणामों को स्वीकार करते हुए सकारात्मक राजनीति करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि चुनाव में जीत और हार लोकतंत्र का हिस्सा है। किसी भी दल को हार के बाद संस्थाओं पर सवाल उठाने के बजाय अपनी रणनीति और जनता के फैसले पर विचार करना चाहिए।
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी विवाद के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच बयानबाजी लगातार जारी है। दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
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