
कार्यक्रम में डॉ. संजय निषाद ने विभिन्न राजनीतिक दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक दलों ने निषाद समाज को सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया। "झौआ भर वोट लेने के लिए पौवा पिलाना" इनकी नीति रही है। लेकिन अब समय बदल गया है। उन्होंने बताया कि निषाद, केवट, बिंद, मंझवार आदि सभी जातियां निषाद वंश से आती हैं और इन सभी को संगठित कर पार्टी का जनाधार 75 जिलों में फैलाया जा रहा है।
निषाद पार्टी कोटे से करछना से विधायक पीयूष रंजन निषाद पर भी डॉ. संजय निषाद ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि वह निषाद समाज के आशीर्वाद से विधायक बने, लेकिन अब उसी समाज से दूरी बना रहे हैं। यह गलत है। इस मामले की जानकारी पार्टी प्रदेश अध्यक्ष को दी गई है। मऊ विधानसभा उपचुनाव को लेकर डॉ. संजय निषाद ने कहा कि पार्टी एनडीए का हिस्सा है और भाजपा को बड़ा भाई मानती है। उन्होंने भरोसा जताया कि भाजपा उन्हें सीट भी देगी और उनकी समस्याओं का समाधान भी करेगी। उन्होंने कहा कि जीत हमारी प्राथमिकता है, सीट नहीं। वहीं, ओमप्रकाश राजभर द्वारा मऊ सीट पर दावा ठोकने के सवाल पर डॉ. निषाद ने सलाह दी कि राजभर जी को भाजपा के निर्णय का सम्मान करना चाहिए। जितनी समस्या उनकी है, उतनी हमारी भी है और उसका समाधान भाजपा ही कर सकती है। बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा भाजपा, सपा और कांग्रेस पर लगाए गए आरोपों पर डॉ. संजय निषाद ने कहा कि मायावती ने एक समय दलित समाज को खड़ा किया, वह सराहनीय है, लेकिन अब उनकी पार्टी अपनी मूल विचारधारा से भटक गई है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब अम्बेडकर ने सामाजिक न्याय की बात की थी, लेकिन मायावती ने 60 प्रतिशत ठेकेदारी केवल लैदरमैन को दे दी। बसपा को अब सबको साथ लेकर चलना चाहिए।
डॉ. संजय निषाद ने एक बार फिर निषाद समाज और इससे जुड़ी जातियों को एससी (अनुसूचित जाति) वर्ग में शामिल करने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हमें ओबीसी से बाहर निकालकर एससी में शामिल किया जाए। इसके लिए समाज को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि जो तुम्हारा झंडा उठाए वह तुम्हारा भाई है, और जो विरोध करे वह कसाई है। अब हम अपने विधायकों और सांसदों से ज्ञापन दिलवाकर इस मांग को केंद्र तक पहुंचाएंगे।





