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मुंबई प्रदर्शन में नाबालिगों की भागीदारी पर NHRC का संज्ञान
Rajeshwari Nishad
3 Oct 2026 3:43 PM IST

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CJP Protest: मुंबई में 2 अक्टूबर को आयोजित एक सार्वजनिक प्रदर्शन में नाबालिग बच्चों की कथित भागीदारी और उनके फोटो-वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लिया है। आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत कार्रवाई शुरू की है। मामले की सुनवाई NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने की।
मामला सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर नाबालिग बच्चों की मौजूदगी और उनकी तस्वीरों तथा वीडियो के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किए जाने से जुड़ा है। आयोग के संज्ञान में यह मामला आने के बाद बच्चों के अधिकारों और उनकी निजता से जुड़े पहलुओं को लेकर कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। नाबालिगों से जुड़े किसी भी मामले में उनकी पहचान और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा को महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में प्रदर्शन से संबंधित तस्वीरों और वीडियो के सार्वजनिक मंचों पर प्रसारित होने की बात सामने आने के बाद यह मामला मानवाधिकार के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हो गया है।
धारा 12 के तहत NHRC ने लिया संज्ञान
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत स्वतः संज्ञान लिया है। इसी प्रावधान के तहत आयोग मानवाधिकारों के उल्लंघन से संबंधित मामलों की जांच और आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है। इस मामले में आयोग का संज्ञान इस बात को रेखांकित करता है कि सार्वजनिक आयोजनों में बच्चों की कथित भागीदारी तथा उनके दृश्य-श्रव्य सामग्री के प्रसार को लेकर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
मामले की सुनवाई NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। आयोग के स्तर पर किसी मामले में संज्ञान लिए जाने के बाद संबंधित तथ्यों, परिस्थितियों और उपलब्ध जानकारी का परीक्षण किया जाता है। ऐसे मामलों में बच्चों से संबंधित अधिकारों और उनकी सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को विशेष महत्व दिया जाता है।
सोशल मीडिया पर फोटो-वीडियो के प्रसार का मुद्दा
इस मामले का एक प्रमुख पहलू सोशल मीडिया पर नाबालिग बच्चों के फोटो और वीडियो के प्रसारित होने से जुड़ा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के व्यापक इस्तेमाल के बीच किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में रिकॉर्ड की गई सामग्री तेजी से अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक पहुंच सकती है। नाबालिगों की तस्वीरें या वीडियो सार्वजनिक होने की स्थिति में उनकी पहचान और निजता से जुड़े सवाल उठ सकते हैं।
प्रदर्शन में मौजूद लोगों द्वारा बनाए गए फोटो या वीडियो के आगे प्रसारित होने की स्थिति में यह तय करना महत्वपूर्ण हो जाता है कि उसमें शामिल नाबालिगों की पहचान किस तरह सार्वजनिक हुई और सामग्री किस स्वरूप में साझा की गई। यही पहलू इस मामले को मानवाधिकार के नजरिए से संवेदनशील बनाता है।
बच्चों के अधिकारों पर केंद्रित मामला
नाबालिग बच्चों के अधिकारों से जुड़े मामलों में उनकी गरिमा, सुरक्षा और निजता महत्वपूर्ण विषय होते हैं। सार्वजनिक गतिविधियों या आयोजनों में बच्चों की मौजूदगी को लेकर परिस्थितियों का परीक्षण करते समय यह देखा जाता है कि कहीं उनकी सुरक्षा या अधिकार प्रभावित तो नहीं हुए। इस मामले में भी कथित भागीदारी के साथ-साथ उनके फोटो और वीडियो के ऑनलाइन प्रसारण का पहलू सामने आया है।
NHRC के संज्ञान के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि मामले से जुड़े तथ्यों को व्यवस्थित रूप से देखा जाएगा और यह पता लगाने की कोशिश होगी कि प्रदर्शन में नाबालिगों की भागीदारी किस परिस्थितियों में हुई तथा उनकी तस्वीरों और वीडियो के सार्वजनिक प्रसार की स्थिति कैसे बनी।
2 अक्टूबर के प्रदर्शन से जुड़ा मामला
यह पूरा मामला मुंबई में 2 अक्टूबर को हुए एक सार्वजनिक प्रदर्शन से संबंधित है। प्रदर्शन के दौरान नाबालिग बच्चों की कथित भागीदारी का मुद्दा उठने के बाद मामला चर्चा में आया। इसके बाद सोशल मीडिया पर प्रसारित फोटो और वीडियो ने मामले को और गंभीर बना दिया।
किसी भी सार्वजनिक प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो सकते हैं और वहां मौजूद गतिविधियों की रिकॉर्डिंग आम बात हो सकती है। हालांकि, जब रिकॉर्डिंग में नाबालिग बच्चे दिखाई देते हैं और वह सामग्री सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित होती है, तो बच्चों की निजता और सुरक्षा से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
NHRC की भूमिका पर नजर
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग देश में मानवाधिकारों के संरक्षण और उनसे जुड़े मामलों की निगरानी के लिए एक महत्वपूर्ण संस्था है। किसी मामले में संज्ञान लिया जाना इस बात का संकेत है कि आयोग ने उपलब्ध जानकारी के आधार पर मामले को अपने स्तर पर देखने की आवश्यकता महसूस की है।
इस मामले में प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा सुनवाई किए जाने से बच्चों से जुड़े मानवाधिकार पहलू पर आयोग के ध्यान का पता चलता है। अब आगे की प्रक्रिया में प्रदर्शन से जुड़े तथ्यों, नाबालिगों की कथित भागीदारी और सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री के संबंध में सामने आने वाली जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल मामले में NHRC का संज्ञान जांच और तथ्यात्मक परीक्षण की प्रक्रिया का हिस्सा है। प्रदर्शन में नाबालिगों की भागीदारी किन परिस्थितियों में हुई और उनके फोटो-वीडियो के प्रसार से जुड़े वास्तविक तथ्य क्या हैं, यह आगे की प्रक्रिया में स्पष्ट हो सकता है। इस बीच मामला बच्चों की निजता, गरिमा और अधिकारों से जुड़े व्यापक सवालों को भी सामने लाता है।
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