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जैश का आतंकी उमर नबी का मोबाइल शॉप में शॉपिंग करते नया VIDEO आया सामने
Shantanu Roy
15 Nov 2025 7:05 PM IST

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New Delhi. नई दिल्ली। दिल्ली में 10 नवंबर को हुए I-20 कार ब्लास्ट की जांच में रोजाना नए खुलासे हो रहे हैं। इस बीच शनिवार को जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकी डॉ. मोहम्मद उमर नबी का एक और CCTV फुटेज हरियाणा के फरीदाबाद से सामने आया है। यह फुटेज ब्लास्ट से 12 दिन पहले, यानी 29 अक्टूबर का है। वीडियो में उमर बेहद सामान्य दिखने की कोशिश करता नजर आता है, जबकि वह देश की राजधानी में बड़ा आतंकी हमला करने की तैयारी में था।
This is another CCTV footage of Jaish terrorist Umar at a Mobile phone shop in Faridabad, Haryana. Shocked to see how he was hatching the terror conspiracy silently and moving freely all around. pic.twitter.com/hXqUuQ2BmF
— Aditya Raj Kaul (@AdityaRajKaul) November 15, 2025
वीडियो में देखा जा सकता है कि फरीदाबाद की एक मोबाइल फोन शॉप में उमर बेंच पर बैठा है। उसके पास साइड बैग है, जिसमें से वह एक मोबाइल निकालकर दुकानदार को चार्जिंग के लिए देता है। उसके हाथ में एक और फोन भी है। फुटेज में उमर लगातार नर्वस नजर आता है, जैसे उसे आसपास की हर गतिविधि पर शक हो। बावजूद इसके, वह खुलेआम भीड़भाड़ वाले इलाके में घूमता रहा और किसी को भनक तक नहीं लगी कि वह आतंकी वारदात की साज़िश रच रहा है।
दिल्ली ब्लास्ट: 13 मौतें, 20 से ज्यादा घायल
10 नवंबर की शाम 6:52 बजे देश तब दहल उठा, जब दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन की पार्किंग में खड़ी I-20 कार में जोरदार धमाका हुआ। कार खुद उमर नबी ही चला रहा था। धमाके में 13 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 20 से ज्यादा लोग घायल हुए। कई घायलों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। जांच एजेंसियों के अनुसार, उमर पिछले कई महीनों से दिल्ली-हरियाणा के बॉर्डर इलाके में सक्रिय था। वह अकेला काम नहीं कर रहा था, बल्कि एक बड़े वाइट कॉलर टेरर नेटवर्क का हिस्सा था जिसमें डॉक्टर, शिक्षित युवा और धार्मिक कट्टरपंथी शामिल थे।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर दो FIR, 5 लोग हिरासत में
दिल्ली पुलिस ने जांच के दौरान फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम सामने आने के बाद दो FIR दर्ज की हैं।
पहली FIR — UGC अधिनियम की धारा 12 के उल्लंघन में
दूसरी FIR — फर्जी मान्यता का दावा करने के आरोप में
इसके बाद यूनिवर्सिटी के दो डॉक्टर, दो स्टाफ सदस्य और एक अन्य व्यक्ति सहित 5 लोगों को हिरासत में लिया गया। एजेंसियों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से 2019 से अब तक की फंडिंग और स्टूडेंट रिकॉर्ड की जानकारी मांगी है। जांच में पाया गया कि आतंकी नेटवर्क को आर्थिक और तकनीकी सहायता देने वाले कई लोग इसी यूनिवर्सिटी से जुड़े थे।
नूंह में 20 लाख का सामान खरीदा गया था बम बनाने के लिए
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आतंकी मॉड्यूल ने हरियाणा के नूंह जिले में विभिन्न दुकानों से करीब 20 लाख रुपये का फर्टिलाइजर, अमोनियम नाइट्रेट और केमिकल खरीदे थे। ये सभी सामग्री I-20 कार ब्लास्ट में इस्तेमाल किए गए विस्फोटक तैयार करने में लगी।
पुलवामा में उमर नबी का घर ध्वस्त
दिल्ली ब्लास्ट में मुख्य भूमिका निभाने वाले उमर नबी के जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के अपने गांव कोइल स्थित घर को सुरक्षा बलों ने ध्वस्त कर दिया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस घर का उपयोग लंबे समय से आतंकियों के लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए किया जा रहा था।
वाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का खुलासा: तीसरी कक्षा पढ़ा मौलाना बना मास्टरमाइंड
दिल्ली ब्लास्ट केस का सबसे बड़ा झटका सुरक्षा एजेंसियों को तब लगा, जब उन्हें पता चला कि एक तीसरी कक्षा तक पढ़ा मौलाना मोहम्मद इरफान डॉक्टरों और हाई-एजुकेटेड युवाओं को कट्टरपंथी बना रहा था। इरफान शोपियां का रहने वाला है और नौगाम की एक मस्जिद में पढ़ाता था। 17 अक्टूबर को उसने ही जैश-ए-मोहम्मद की धमकी भरा पोस्टर लिखा, जिसे वह खुर्द-बुर्द कराने ले गया। जवानों ने पोस्टर देखने के बाद जांच शुरू की और जल्द ही इरफान तक पहुंच गए। उसके कमरे से और भी कई धमकी भरे पोस्टर मिले, जिसके बाद पहला केस दर्ज हुआ। हालांकि मामला यहीं नहीं रुका। इसके बाद 27 अक्टूबर को नौगाम में लगे नए पोस्टरों की CCTV फुटेज से जिस आरोपी की पहचान हुई, वह कोई साधारण शख्स नहीं था, बल्कि कुलगाम के वांपोरा निवासी डॉक्टर अदील मोहम्मद था। इसने ही मॉड्यूल के कई सदस्यों को जोड़ने का काम किया था।
जांच अब फंडिंग और नेटवर्क तक पहुंची
दिल्ली पुलिस, NIA और अन्य केंद्रीय एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की फंडिंग, भर्ती, टेक्निकल सपोर्ट और विदेश कनेक्शन की गहन जांच कर रही हैं। ज्यादातर गिरफ्तार या संदिग्ध आरोपी जैश-ए-मोहम्मद के निर्देश पर काम कर रहे थे। कई लोग सोशल मीडिया के जरिये भी कट्टरपंथ की राह पर लाए गए। देश की राजधानी में हुआ यह ब्लास्ट सिर्फ आतंकी घटना नहीं, बल्कि एक बड़े वाइट कॉलर आतंकी तंत्र का पर्दाफाश है। इसमें न सिर्फ अशिक्षित, बल्कि शिक्षित पेशेवर और धार्मिक ठेकेदार शामिल पाए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियां आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे कर सकती हैं।
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