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पनीर पर देशभर में लग सकता है बैन, FSSAI सख्ती की तैयारी में
Shantanu Roy
28 Aug 2026 8:46 PM IST

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New Delhi. नई दिल्ली। अगर आप पनीर से बनी चीजें खाना पसंद करते हैं या होटल और रेस्टोरेंट में पनीर की डिश ऑर्डर करते हैं, तो इससे जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। देश में एनालॉग पनीर के इस्तेमाल को लेकर खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं बढ़ रही हैं। कई राज्यों में ऐसे उत्पादों को लेकर कार्रवाई हो चुकी है और अब केंद्र स्तर पर भी इस मामले में बड़ा कदम उठाए जाने की संभावना जताई जा रही है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI इस मामले को गंभीरता से देख रहा है। FSSAI के CEO राजित पुन्हानी के अनुसार, एनालॉग पनीर का मुद्दा अब केवल कुछ राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश से जुड़ा विषय बन गया है। ऐसे में इसके इस्तेमाल पर व्यापक स्तर पर रोक लगाने की दिशा में आगे कदम उठाया जा सकता है।
क्या होता है एनालॉग पनीर?
एनालॉग पनीर देखने में सामान्य पनीर जैसा दिखाई दे सकता है, लेकिन इसे पारंपरिक पनीर की तरह पूरी तरह दूध से तैयार नहीं किया जाता। इसे बनाने में दूध से मिलने वाले पारंपरिक फैट और सॉलिड्स के बजाय वनस्पति तेल या दूसरी गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। यही वजह है कि इसे लेकर खाद्य नियामक की ओर से स्पष्टता पर जोर दिया जा रहा है। FSSAI पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि ऐसे उत्पाद को केवल ‘पनीर’ के नाम से बाजार में बेचा नहीं जा सकता। मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि ग्राहक जिस उत्पाद को पनीर समझकर खरीदता या खाता है, उसके बारे में उसे सही जानकारी मिलनी चाहिए। उत्पाद की वास्तविक प्रकृति और उसकी सामग्री की जानकारी स्पष्ट होना खाद्य कारोबार में पारदर्शिता से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
कई राज्यों में हो चुकी है कार्रवाई
एनालॉग पनीर को लेकर देश के कई राज्यों में पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड और पंजाब में इस तरह के मामलों को लेकर सख्ती देखने को मिली है। राज्यों में हुई कार्रवाई के बाद अब इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान बढ़ा है। खाद्य सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों की चिंता यह है कि अगर किसी उत्पाद को असली पनीर के रूप में पेश किया जा रहा है, तो उपभोक्ता को उसके बारे में सही जानकारी मिलनी चाहिए। इसी वजह से नियामक स्तर पर उत्पादों की पहचान, लेबलिंग और उनके इस्तेमाल को लेकर नियमों के पालन पर जोर दिया जा रहा है।
देशभर में रोक लगी तो किस पर पड़ेगा असर?
अगर केंद्र स्तर पर एनालॉग पनीर के इस्तेमाल और बिक्री को लेकर देशव्यापी रोक लागू होती है, तो इसका सीधा असर उन होटल, रेस्टोरेंट और खाद्य कारोबारियों पर पड़ सकता है, जो ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं। खाद्य कारोबारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि ग्राहकों को जो उत्पाद पनीर के नाम से दिया जा रहा है, वह निर्धारित खाद्य मानकों के अनुरूप हो। इसके साथ ही उत्पाद के बारे में सही जानकारी देना भी जरूरी होगा। यह कदम मुख्य रूप से उपभोक्ताओं को भ्रम से बचाने और खाद्य उत्पादों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में देखा जा रहा है। अभी इस मामले में अंतिम फैसला सामने नहीं आया है, लेकिन FSSAI की सख्ती के संकेतों के बाद एनालॉग पनीर को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है।
उपभोक्ताओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
एनालॉग पनीर का मामला केवल किसी एक खाद्य उत्पाद की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध इस बात से भी है कि ग्राहकों को जो चीज बताकर बेची जा रही है, वह वास्तव में वही है या नहीं। खाद्य नियामक की कोशिश ऐसे मामलों में उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराने की है। यदि किसी उत्पाद की सामग्री और प्रकृति सामान्य पनीर से अलग है, तो उसके बारे में स्पष्ट जानकारी मिलना जरूरी है। फिलहाल FSSAI की ओर से एनालॉग पनीर को लेकर सख्ती की तैयारी के संकेत सामने आए हैं। कई राज्यों में कार्रवाई के बाद अब केंद्र स्तर पर संभावित फैसले पर नजर है। यदि देशभर में इस्तेमाल और बिक्री पर रोक लगाने का निर्णय लिया जाता है, तो खाद्य कारोबारियों के लिए नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, अभी इसे लेकर यह कहना जल्दबाजी होगी कि पूरे देश में पनीर पर प्रतिबंध लगने वाला है। मामला विशेष रूप से *एनालॉग पनीर* से जुड़ा है, न कि सामान्य दूध से बने पारंपरिक पनीर पर किसी प्रतिबंध से। अंतिम निर्णय और उसके बाद लागू होने वाले नियम ही स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट करेंगे।
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