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मोदी सरकार ने OBC क्रीमीलेयर पर बनाया नया प्रस्ताव, आरक्षण को लेकर बड़ी खबर जल्द

Nilmani Pal
13 Aug 2025 8:16 AM IST
मोदी सरकार ने OBC क्रीमीलेयर पर बनाया नया प्रस्ताव, आरक्षण को लेकर बड़ी खबर जल्द
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दिल्लीकेंद्र सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदाय के विभिन्न वर्गों के बीच आरक्षण का लाभ पहुंचाने के लिए एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जो विभिन्न केंद्रीय और राज्य सरकारों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, विश्वविद्यालयों और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के बीच क्रीमीलेयर के मामले में समतुल्यता स्थापित करता हो। यानी जो लोग इन संगठनों में कार्यरत हैं और पद एवं वेतनमान के मामले में क्रीमीलेयर वाली आय सीमा में आते हैं, उन्हें क्रीमीलेयर के दायरे में लाया जा सकता है।

दरअसल, सरकार, मौजूदा समय में अन्य पिछड़ा वर्ग 'क्रीमी लेयर' का दायरा बढ़ाकर नए मानदंड लागू करना चाहती है, ताकि ओबीसी आरक्षण का लाभ समाज के निचले तबके तक पहुंच सके और इस समुदाय के संपन्न या उच्च पदों पर मौजूद लोगों को इससे बाहर किया जा सके। सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि आय बहिष्करण मानदंड लागू करने और समतुल्यता स्थापित करने के प्रस्ताव पर सरकार सक्रिय रूप से विचार कर रही है। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि यह प्रस्ताव सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, शिक्षा, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, विधि मामले, श्रम एवं रोजगार, सार्वजनिक उद्यम, नीति आयोग और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) के बीच परामर्श के बाद तैयार किया गया है।

बता दें कि 1992 में इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद ओबीसी के भीतर 'क्रीमी लेयर' की अवधारणा को आरक्षण नीति में शामिल किया गया था। इसके तहत जो लोग सरकारी नौकरियों में नहीं थे, उनके लिए 'क्रीमी लेयर' की आय सीमा 1993 में 1 लाख रुपये प्रति वर्ष निर्धारित की गई थी। बाद में 2004, 2008 और 2013 में इस आय सीमा में संशोधन किया गया। 2017 में, क्रीमीलेयर की आय सीमा बढ़ाकर 8 लाख रुपये प्रति वर्ष की गई, जो अभी भी बरकरार है। ओबीसी क्रीमीलेयर से मतलब ओबीसी समुदाय के उन लोगों से है जो मलाईदार कहे जाते हैं। इसके तहत वैसे लोगों को शामिल किया गया था, जो सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत हों या संवैधानिक पदों पर आसीन हों। इसके तहत वे या तो अखिल भारतीय सेवाओं, केंद्रीय सेवाओं और राज्य सेवाओं के ग्रुप-ए/क्लास-I के अधिकारी हों; या केंद्र और राज्य की ग्रुप-बी/क्लास-II सेवाओं में कार्यरत हों; या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारी-अधिकारी हों; या सशस्त्र बलों के अधिकारी; पेशेवर और व्यापार एवं उद्योग जगत से जुड़े लोग हों; या बड़ी संपत्ति के मालिक हों या आय/संपत्ति के मामले में संपन्न हों।

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