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मिसिंग लिंक ट्रस्ट (MLT) ने बाल सुरक्षा के लिए लॉंच किया “खुली बात”

Shantanu Roy
14 Sept 2026 1:08 PM IST
मिसिंग लिंक ट्रस्ट (MLT)  ने बाल सुरक्षा के लिए लॉंच किया “खुली बात”
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माता-पिता और बच्चों की देखभाल करने वाले अब बनेंगे सशक्त
Mumbai. मुंबई। बच्चों की सुरक्षा हमेशा एक भरोसेमंद बातचीत से शुरू होती है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की “क्राइम इन इंडिया 2024” रिपोर्ट के अनुसार, भारत में “प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज (पोक्सो) एक्ट” के तहत 69,191 मामले दर्ज किए गए। इनमें से 96 प्रतिशत से ज़्यादा मामलों में आरोपी कोई अजनबी नहीं, बल्कि करीबी लोग ही थे। बच्चों का शोषण न हो, इसके लिए जरूरी है कि उन्हें रिश्तों की सीमा, सहमति और एक हेल्दी रिलेशन को समझने, असहज करने वाली स्थितियों या गतिविधियों की
पहचान करनी
आती हो। उन्हें यह पता हो कि कब और कैसे मदद लेनी है। ये सारे कदम बाल शोषण को रोकने के लिए ज़रूरी कदम हैं। साथ ही, यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि माता-पिता, शिक्षकों और बच्चों की देखभाल करने वालों के पास बच्चों की बात सुनने, जवाब देने और उनका साथ देने के लिए पर्याप्त की जानकारी हो।

मिसिंग लिंक ट्रस्ट (MLT) ने इसी 'रोकथाम-पहले' वाले नज़रिए को आगे बढ़ाने का काम किया है। MLT ने आज Capgemini India के साथ मिलकर 'खुली बात' लॉन्च किया, जो बच्चों की सुरक्षा के लिए एक एआई-इनेबल्ड, व्हाट्सऐप-बेस्ड चैटबॉट है। माता-पिता और बच्चों की देखभाल करने वालों को बाल सुरक्षा से जुड़ी भरोसेमंद जानकारी और मार्गदर्शन आसानी से मिल सके, इसी के लिए 'खुली बात' (यानी खुल कर बातचीत करना) बनाया गया है। यह उन्हें अपनी देखरेख में रहने वाले बच्चों के साथ सीमाओं, सहमति, रिश्तों, ऑनलाइन सुरक्षा, दुर्व्यवहार और शोषण के बारे में बातचीत करने में मदद करता है। साथ ही, यह ज़रूरत पड़ने पर उन्हें सही मदद और संसाधनों तक पहुँचाता है।

कोई भी गार्डियन इस व्हाट्सऐप चैटबॉट (6003060040) पर 'Hi' मैसेज भेज कर बातचीत शुरू कर सकता है। महाराष्ट्र सरकार के सूचना और जनसंपर्क विभाग के प्रधान सचिव, आईपीएस श्री बृजेश सिंह और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने इस चैटबॉट को लॉन्च किया। MLT मुंबई के 100 बीएमसी स्कूलों में रोकथाम-पहले जैसे इनिशिएटिव पर काम करता है। यह साझेदारी तीन क्षेत्रों में हुई है। पहला, स्कूल-आधारित कार्यक्रमों के ज़रिए 10,000 किशोरों को सुरक्षा संबंधी शिक्षा देना। दूसरा, माता-पिता, शिक्षकों और देखभाल करने वालों के लिए एआई-इनेबल्ड सुरक्षा चैटबॉट के तौर पर 'खुली बात' विकसित करना। और तीसरा, विभिन्न हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के ज़रिए बच्चों के खिलाफ़ यौन हिंसा मामलों में सिस्टम की प्रतिक्रिया को मज़बूत करना।

मिसिंग लिंक ट्रस्ट की फाउंडर ट्रस्टी और सीईओ, लीना केजरीवाल ने कहा:
“खुली बात एआई मॉडल से मिलने वाली कोई आम सलाह नहीं है। यह हमारे दस साल से अधिक समय तक किए गए ज़मीनी काम पर आधारित है। इसमें जोखिम के सही और स्थानीय पैटर्न को ध्यान में रखा गया है और यह भारतीय परिवारों की असल ज़िंदगी की स्थितियों के प्रति संवेदनशील है। हर जवाब एक सोच-समझकर तैयार किए गए नॉलेज बेस से आता है, जिसे पूर्वाग्रह, जेंडर और पावर डायनामिक्स (सत्ता समीकरण) को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसे ऐसे डिज़ाइन किया गया है कि अलग-अलग स्तर की डिजिटल पहुँच और जानकारी रखने वाले वयस्क भी इसका इस्तेमाल कर सकें। यह सिर्फ़ जानकारी देने तक सीमित नहीं है। यह परिवारों को वास्तविक, स्थानीय सपोर्ट और रिपोर्टिंग के तरीकों से जोड़ता है। इसलिए इसका मकसद सिर्फ़ वयस्कों को जानकारी देना नहीं है, बल्कि उन्हें यह समझने में मदद करना है कि वे क्या देख रहे हैं और उसके हिसाब से सही कदम उठा सकें।”

कैपजेमिनी के वाइस प्रेसिडेंट और सीएसआर हेड - इंडिया, कुमार अनुराग प्रताप ने कहा:
“आज बच्चे ऑनलाइन ज्यादा समय बीता रहे हैं। टेक्नोलॉजी अपने साथ नए अवसर और नए जोखिम, दोनों ला रही है, जिससे बचाव और शुरुआती स्तर पर ही कदम उठाना और भी महत्वपूर्ण हो गया है। ‘खुली बात’टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके माता-पिता और बच्चों की देखभाल करने वालों तक बच्चों की सुरक्षा से जुड़े भरोसेमंद संसाधन आसानी से पहुँचाती है, और इसके लिए ऐसे प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है जिनका वे पहले से ही इस्तेमाल कर रहे हैं।”
ये नई पहल मिसिंग लिंक ट्रस्ट के 'मिसिंग अवेयरनेस एंड स्कूल सेफ्टी प्रोग्राम' (MASSp) के तहत किए जा रहे व्यापक रोकथाम कार्यों को आगे बढ़ाती है। यह प्रोग्राम गार्डियन को बच्चों के ख़िलाफ़ यौन हिंसा, ऑनलाइन सुरक्षा, सीमाओं, ग्रूमिंग, अपनी बात रखने और मदद मांगने से जुड़ी जानकारी और कौशल से लैस करता है। “खुली बात” के ज़रिए, MLT का मकसद बाल सुरक्षा वाले इकोसिस्टम को मज़बूत करना है। साथ ही, इसका लक्ष्य सुरक्षा शिक्षा, खुलकर बातचीत करने और शुरुआत में ही मदद मांगने की आदत को बचपन का एक आम हिस्सा बनाना है।
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