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इंदौरा में खनन माफिया ने बिगाड़ा ब्यास का नक्शा, बाढ़ का खतरा

Shantanu Roy
17 Jun 2026 3:39 PM IST
इंदौरा में खनन माफिया ने बिगाड़ा ब्यास का नक्शा, बाढ़ का खतरा
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Indora. इंदौरा। इंदौरा उपमंडल के मंड, काठगढ़, मंड सनौर तथा अरनी विश्वविद्यालय के आसपास का क्षेत्र संभावित बाढ़ और कथित अवैध खनन को लेकर चिंता के केंद्र में है। मानसून से पहले अरनी विश्वविद्यालय प्रशासन ने केंद्र सरकार, हिमाचल प्रदेश सरकार, केंद्रीय जल आयोग और अन्य संबंधित विभागों को ज्ञापन भेजकर क्षेत्र की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में पौंग बांध से छोड़े जाने वाले पानी तथा ब्यास नदी के किनारों पर कथित अवैज्ञानिक खनन के कारण नदी के प्राकृतिक स्वरूप में बदलाव आया है। इससे नदी किनारों पर कटाव बढ़ा है और आसपास के गांवों में बाढ़ का खतरा बढऩे की आशंका है। प्रशासन का यह भी दावा है कि बाढ़ के आकलन में ब्यास नदी में मिलने वाली दस से 12 छोटी-बड़ी खड्डों के जल प्रवाह को पर्याप्त महत्त्व नहीं दिया जाता, जबकि बरसात के दौरान इनका अतिरिक्त पानी स्थिति को गंभीर
बना सकता है।


भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने स्पष्ट किया है कि पौंग बांध का संचालन पूरी तरह वैज्ञानिक मानकों और निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाता है। बोर्ड के अनुसार जल निकासी संबंधी निर्णय तकनीकी विशेषज्ञों की समिति द्वारा लिए जाते हैं तथा संभावित बाढ़ के प्रभाव को नियंत्रित रखने के लिए चरणबद्ध तरीके से पानी छोड़ा जाता है। गत 11 जून को तलवाड़ा में आयोजित मानसून तैयारी बैठक में अरनी विश्वविद्यालय ने जलाशय संचालन प्रणाली और रूल कर्व की समीक्षा, संवेदनशील क्षेत्रों में बाढ़ सुरक्षा दीवारों के निर्माण तथा दीर्घकालिक सुरक्षा योजना की मांग उठाई। विश्वविद्यालय ने आरोप लगाया कि बैठक में अवैध खनन, नदी के चौड़ीकरण और पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई चिंताओं को आधिकारिक कार्यवृत्त में पर्याप्त स्थान नहीं दिया गया। विश्वविद्यालय का आरोप है कि कुछ स्थानों पर कथित अवैध खनन से ब्यास नदी के प्रवाह और स्वरूप पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, जिससे भविष्य में कटाव और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। संस्थान ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल, प्रधानमंत्री कार्यालय तथा केंद्रीय जल आयोग को भेजे गए ज्ञापनों में बाढ़ सुरक्षा, नदी प्रबंधन और कथित अवैध खनन की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
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