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Himachal Pradesh हिमाचल प्रदेश: मानव भारती यूनिवर्सिटी से जुड़े 387 करोड़ रुपये के फर्जी डिग्री घोटाले में कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को आरोपी मनदीप राणा की दो संपत्तियों को जब्त करने का आदेश दिया। मनदीप राणा को 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी' घोषित किया जा चुका है। ईडी के शिमला सब-जोनल ऑफिस को 23 अप्रैल को स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) से जब्ती का आदेश मिला। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत जांच शुरू की। यह जांच सोलन जिले के धरमपुर पुलिस स्टेशन में आईपीसी, 1860 की अलग-अलग धाराओं (पीएमएलए के तहत शेड्यूल किए गए अपराध) के तहत दर्ज तीन एफआईआर के आधार पर की गई। ये एफआईआर मानव भारती यूनिवर्सिटी और उससे जुड़ी संस्थाओं से जुड़े एक बड़े फर्जी डिग्री घोटाले के संबंध में थीं।
ईडी की जांच में पता चला कि राज कुमार राणा ने अपने सह-आरोपियों, जिनमें उसकी पत्नी अश्वनी कंवर और बेटा मनदीप राणा शामिल हैं, के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश रची। इसके तहत उन्होंने एजेंटों और बिचौलियों के जरिए फर्जी डिग्रियां बेचने का एक सुनियोजित रैकेट चलाया। ईडी ने बताया कि ये फर्जी डिग्रियां सोलन स्थित मानव भारती यूनिवर्सिटी के नाम पर छात्रों से पैसे लेकर जारी की जाती थीं। ईडी ने आगे कहा कि इस धोखाधड़ी का पैमाना चौंकाने वाला है। अपराध से हासिल रकम लगभग 387 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह एक बहुत ही गंभीर वित्तीय अपराध है, जिसमें आरोपियों ने अनगिनत युवाओं के करियर, सपनों और भविष्य के साथ खिलवाड़ किया। उन्होंने मामूली वित्तीय फायदे के लिए इन युवाओं को गंभीर शैक्षणिक और पेशेवर जोखिम में डाल दिया।
एजेंसी ने बताया कि अपराध से हासिल रकम को सुनियोजित तरीके से कई चरणों में घुमाया गया (लेयरिंग) और मनी लॉन्ड्रिंग की गई। इसके बाद, इस रकम को कई राज्यों में आरोपियों और उनसे जुड़ी संस्थाओं के नाम पर चल और अचल संपत्तियां खरीदने में निवेश किया गया। ईडी ने अब तक लगभग 200 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की हैं। पीएमएलए के तहत गठित निर्णायक प्राधिकरण ने इन सभी जब्तियों की पुष्टि की है। ईडी ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया की घोर और सोची-समझी अवहेलना करते हुए, मनदीप राणा ने अदालत द्वारा जारी समन को जानबूझकर नजरअंदाज किया और उनका पालन नहीं किया। उसने जानबूझकर कानून की उचित प्रक्रिया से बचने का रास्ता चुना।
केंद्रीय एजेंसी ने आगे कहा कि बार-बार समन जारी किए जाने और ईडी की ओर से उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए व्यापक और लगातार प्रयास किए जाने के बावजूद, आरोपी ने जानबूझकर और लगातार जांच में शामिल होने या भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र के अधीन आने से इनकार कर दिया।
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