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मानव भारती फर्जी डिग्री प्रकरण, पूर्व-वर्तमान डीजीपी आमने-सामने

Shantanu Roy
5 Aug 2026 3:35 PM IST
मानव भारती फर्जी डिग्री प्रकरण, पूर्व-वर्तमान डीजीपी आमने-सामने
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Shimla. शिमला। मानव भारती विश्वविद्यालय फर्जी डिग्री मामले को लेकर हिमाचल प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने सोमवार को विस्तृत प्रेस नोट जारी कर आधिकारिक स्पष्टीकरण दिया है। पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी प्रैस विज्ञाप्ति में पूर्व डीजीपी एसआर मरड़ी के हालिया बयानों पर आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर जवाब दिया है, जिसमें कहा है कि पूर्व डीजीपी द्वारा इस मामले में एफआईआर दर्ज होने में हुई देरी के लिए सीआईडी अपराध शाखा को जिम्मेदार ठहराने वाले बयान उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते। आधिकारिक दस्तावेज इस मामले में घटनाक्रम की अलग तस्वीर पेश करते हैं। पुलिस मुख्यालय के अनुसार, 27 फरवरी, 2020 को तत्कालीन डीजीपी एसआर मरडी ने हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग के सचिव से प्राप्त शिकायत को अपराध शाखा (सीआईडी) को भेजते हुए निर्देश दिए थे कि मामले की जांच की जाए और यदि संज्ञेय अपराध बनता है। प्राथमिकता के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच
शुरू की जाए।

पुलिस मुख्यालय के प्रैस विज्ञाप्ति के मुताबिक, सीआईडी अपराध शाखा ने उसी दिन पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र कालिया की निगरानी में एसआईटी का गठन कर दिया। एसआईटी ने मात्र एक सप्ताह के भीतर जांच पूरी कर आवश्यक दस्तावेज और साक्ष्य जुटाए, विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार की, भराड़ी स्थित सीआईडी क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की और एफआईआर का मसौदा भी तैयार कर लिया। यह पूरी फाइल चार मार्च, 2020 को तत्कालीन डीजीपी के अनुमोदन के लिए भेज दी गई थी। पुलिस मुख्यालय ने दावा किया कि सीआईडी की सिफारिश के अनुसार एफआईआर दर्ज कराने की मंजूरी देने के बजाय तत्कालीन डीजीपी ने पूरी जांच फाइल और सिफारिशों को आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक सोलन को भेजने के निर्देश दिए। पुलिस मुख्यालय के अनुसार उपलब्ध रिकॉर्ड में यह कहीं दर्ज नहीं है कि ऐसा निर्णय क्यों लिया गया। इसलिए इस निर्णय के पीछे के कारण केवल तत्कालीन डीजीपी एसआर मरड़ी ही स्पष्ट कर सकते हैं। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया कि सीआईडी अपराध शाखा ने केवल तत्कालीन डीजीपी के निर्देशों का पालन करते हुए पूरी जांच फाइल सोलन पुलिस को सौंप दी थी। रिकॉर्ड के अनुसार सीआईडी ने न तो जांच में देरी की, न कोई साक्ष्य छिपाया और न ही एफआईआर दर्ज करने की अपनी सिफारिश रोकी।
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