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CJP प्रदर्शन पर बड़ा फैसला: 13 केस बंद करने SC पहुंची दिल्ली पुलिस

SHIDDHANT
31 Aug 2026 9:43 PM IST
CJP प्रदर्शन पर बड़ा फैसला: 13 केस बंद करने SC पहुंची दिल्ली पुलिस
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CJP प्रोटेस्ट केस में नया ट्विस्ट सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला
Delhi दिल्ली: दिल्ली में हुए CJP विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। पुलिस ने शीर्ष अदालत को बताया है कि वह जुलाई में हुए प्रदर्शनों से संबंधित 13 एफआईआर पर अब आगे कार्रवाई नहीं करना चाहती। इसके लिए दिल्ली पुलिस ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मांगी है। दिल्ली पुलिस की ओर से दायर आवेदन पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले को रखा। उन्होंने तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि पुलिस इन मामलों को खत्म करने के लिए अंतरिम आवेदन दाखिल करना चाहती है।
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि केंद्र सरकार के 25 जुलाई के फैसले के अनुसार, दिल्ली पुलिस इन 13 मामलों में आगे कार्रवाई नहीं करना चाहती है। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने 2873 लोगों के खिलाफ अलग से जांच की मांग की है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान मौजूद इन लोगों की भूमिका की जांच जरूरी है, क्योंकि कुछ मामलों में हिंसा, शारीरिक नुकसान और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप सामने आए थे।
पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मांगी है कि इन लोगों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज कर जांच की जा सके। दिल्ली पुलिस का कहना है कि जिन घटनाओं का उल्लेख आवेदन में किया गया है, उनके लिए पुराने मामलों में आगे कार्रवाई नहीं की जाएगी, लेकिन गंभीर आरोपों में शामिल लोगों की भूमिका की जांच अलग से होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि अगर पक्षकार किसी समाधान पर पहुंच रहे हैं तो इसमें कोई समस्या नहीं है। अदालत अब इस मामले पर मंगलवार को सुनवाई करेगी।
दिल्ली पुलिस ने अपने आवेदन में कहा है कि जनहित और मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए अनुच्छेद 142 के तहत एफआईआर खत्म करने और नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी जा रही है। अदालत अपने आदेश में यह भी स्पष्ट कर सकता है कि यह फैसला केवल इस मामले के तथ्यों तक सीमित रहेगा और इसे भविष्य के मामलों में मिसाल नहीं माना जाएगा। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब CJP की ओर से दिल्ली में फिर से विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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