
भारत: मनरेगा में होने वाले फर्जी कार्यों, कागजी प्रगति और भुगतान संबंधी गड़बड़ियों को रोकने के लिए विकसित भारत जी-रामजी (VB-G RAM G) योजना के तहत निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। नई व्यवस्था में अब सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ ग्रामीणों को भी सरकारी कामों की निगरानी का अधिकार मिलेगा। इसका उद्देश्य योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और सरकारी धन के गलत इस्तेमाल को रोकना है।
नई निगरानी व्यवस्था के तहत योजना के कामों की जांच के लिए त्रिस्तरीय सिस्टम तैयार किया गया है। इसमें सरकारी निगरानी, डिजिटल रिकॉर्ड और ग्रामीणों की भागीदारी को शामिल किया गया है। सरकार का मानना है कि जब गांव के लोग खुद अपने क्षेत्र में होने वाले विकास कार्यों पर नजर रखेंगे तो फर्जीवाड़े और अनियमितताओं को रोकने में काफी मदद मिलेगी।
इस व्यवस्था का सबसे अहम हिस्सा जनता सूचना बोर्ड होगा। अब हर कार्यस्थल पर सूचना बोर्ड लगाया जाएगा, जिसमें योजना से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां सार्वजनिक की जाएंगी। इसमें परियोजना की कुल लागत, स्वीकृत राशि, काम शुरू होने की तारीख, पूरा होने की अवधि, कार्य दिवस और मजदूरों की संख्या जैसी जानकारी दर्ज होगी।
इससे ग्रामीणों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे मौके पर ही देख सकेंगे कि उनके गांव में किस काम के लिए कितना पैसा स्वीकृत हुआ है और जमीन पर कितना काम हुआ है।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी सूचना बोर्ड पर 100 मजदूरों के काम करने का उल्लेख किया गया है, लेकिन ग्रामीणों को पता है कि वास्तव में इतने लोग काम पर नहीं आए थे, तो वे इसकी शिकायत कर सकेंगे। इसी तरह अगर किसी परियोजना को कागजों में पूरा दिखाया गया है, जबकि मौके पर काम अधूरा है, तो इसकी जानकारी भी सामने आ जाएगी।
सरकार ने सोशल ऑडिट व्यवस्था को भी और प्रभावी बनाने की योजना बनाई है। सोशल ऑडिट के तहत ग्रामसभा, ग्रामीण और स्वतंत्र सोशल ऑडिट टीम मिलकर यह जांच करेंगे कि स्वीकृत कार्य वास्तव में हुआ है या नहीं। इसके अलावा मजदूरी का भुगतान सही लोगों को हुआ या नहीं और खर्च का रिकॉर्ड वास्तविक स्थिति से मेल खाता है या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी।
नई व्यवस्था में डिजिटल रिकॉर्ड को भी महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। अब मजदूरों की उपस्थिति, भुगतान और कार्य की प्रगति से जुड़ी जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज होगी। इससे किसी भी तरह की गड़बड़ी पकड़ना आसान होगा।
पहले कई मामलों में रिकॉर्ड की जांच में काफी समय लग जाता था, लेकिन डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद भुगतान और काम की स्थिति का मिलान तेजी से किया जा सकेगा। अगर किसी मजदूर के नाम पर फर्जी भुगतान किया गया है या किसी अधूरे काम को पूरा दिखाया गया है, तो उसकी जांच जल्दी हो सकेगी।
मनरेगा जैसी ग्रामीण रोजगार योजना में समय-समय पर फर्जी मस्टर रोल, गलत भुगतान और कागजों पर विकास कार्य दिखाने जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। नई व्यवस्था का उद्देश्य ऐसी समस्याओं पर रोक लगाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सूचना बोर्ड नियमित रूप से अपडेट किए गए और सोशल ऑडिट को प्रभावी तरीके से लागू किया गया तो ग्रामीण विकास योजनाओं में पारदर्शिता काफी बढ़ सकती है। इससे न केवल भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगेगा, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।
VB-G RAM G योजना के तहत सरकार की कोशिश है कि विकास कार्यों में जनता की भागीदारी बढ़ाई जाए। अब गांव के लोग केवल योजनाओं के लाभार्थी नहीं होंगे, बल्कि वे अपने क्षेत्र में होने वाले सरकारी कामों के निगरानीकर्ता भी बनेंगे। इससे जवाबदेही बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद है।





