
एमपी। शिवपुरी जिले स्थित राजा नल-दमयंती के 'नरवर किले' से एक हैरान करने वाली वारदात सामने आई है. यहां सुरक्षा इंतजामों को धता बताते हुए करीब 25 से 30 हथियारबंद बदमाशों ने 16वीं शताब्दी की एक बेहद दुर्लभ और बहुमूल्य अष्टधातु की तोप को लूट लिया है. डकैत आधी रात को किले के पिछले दुर्गम रास्ते से लोडिंग गाड़ियां लेकर अंदर घुसे और वहां तैनात निहत्थे सुरक्षाकर्मियों को जान से मारने की धमकी देकर खदेड़ दिया. इसके बाद वे भारी-भरकम तोप को वाहन में लादकर फरार हो गए.
ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी ने इस खौफनाक रात की दास्तां बयां करते हुए बताया कि रात में अचानक 30 के करीब हथियारबंद बदमाश धारदार हथियार और बंदूकें लेकर आ धमके. गार्ड ने प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोलते हुए कहा, "हमारे पास सुरक्षा के नाम पर सिर्फ एक डंडा था, यहां तक कि रोशनी के लिए टॉर्च भी नहीं थी. बदमाशों ने हमें चारों तरफ से घेर लिया और जान से मारने की धमकी दी.
अपनी जान बचाने के लिए हमें वहां से भागना पड़ा." गौरतलब है कि किले की ओपन कचहरी में सिंधिया राजवंश के समय की ऐसी 14 ऐतिहासिक तोपें रखी हुई थीं, जो अब घटकर केवल 13 रह गई हैं. जांच में सामने आया है कि शातिर चोरों ने इस बड़ी वारदात की बकायदा रेकी की थी और इसका एक 'ट्रेलर' 5 जुलाई को ही दिखा दिया था. 5 जुलाई को बदमाशों ने ओपन कचहरी से भारी-भरकम तोप को स्टैंड से नीचे गिरा दिया था, लेकिन अत्यधिक वजन होने के कारण वे उसे ले जाने में नाकाम रहे थे.
इस घटना के बाद भी स्थानीय पुलिस और पुरातत्व विभाग गहरी नींद में सोया रहा. नतीजा यह हुआ कि 15-16 जुलाई की रात बदमाश पूरी तैयारी के साथ लोडिंग वाहन लेकर पिछले रास्ते से किले की दीवार फांदकर अंदर घुसे. 16 जुलाई को सुबह जब तोप गायब मिली, तब केयरटेकर ने नरवर थाने में शिकायत दर्ज कराई. हालांकि, शुरुआती दौर में स्थानीय पुलिस मामले को ठंडे बस्ते में डालती नजर आई, लेकिन मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचने पर हड़कंप मच गया.





