
गुजरात। गिर नेशनल पार्क में दो शेरों की दोस्ती की मिसाल ऐसी थी कि लोग उन्हें 'जय और वीरू' कहकर पुकारते थे। 1975 की ब्लॉकबस्टर फिल्म शोले के इस जोड़े की तरह ये दोनों शेर भी एक-दूसरे के बिना अधूरे थे। सालों तक ये दोनों गिर के जंगल में एक साथ घूमते-फिरते रहे, जिसके किस्से जंगल के रास्तों से लेकर पर्यटकों की जुबान तक गूंजते थे। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस साल अपनी गिर यात्रा के दौरान इस अनोखी जोड़ी के दीदार किए थे। लेकिन अब ये दोनों शेर केवल कहानियों में बचे हैं।
लेकिन जंगल का नियम बड़ा कठोर है। करीब एक महीने पहले, जब जय और वीरू एक-दूसरे के साथ नहीं थे, दोनों को अलग-अलग क्षेत्रीय लड़ाइयों में गंभीर चोटें आईं। वीरू ने 11 जून को अपनी चोटों के आगे दम तोड़ दिया, जबकि जय ने मंगलवार को आखिरी सांस ली। गुजरात के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक और मुख्य वन्यजीव वार्डन जयपाल सिंह ने बताया, 'दोनों शेर एक ही प्राइड (शेरों के झुंड) का नेतृत्व करते थे। हमने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन दोनों को नहीं बचा सके।'
वन्यजीव संरक्षक (सासण-गिर) मोहन राम ने बताया कि जय और वीरू नर शेरों की उम्र में अपने चरम पर थे और करीब 15 मादा शेरों के साथ जंगल में राज करते थे। इनका इलाका इतना बड़ा था कि यह पर्यटन क्षेत्र से लेकर गैर-पर्यटन क्षेत्र, घास के मैदानों से लेकर जंगलों और किनारे के इलाकों तक फैला हुआ था। लेकिन जब ये दोनों साथ नहीं थे, तब दूसरों शेरों के साथ हुए टकराव में इन्हें गहरी चोटें लगीं। राज्यसभा सांसद और वन्यजीव प्रेमी परिमल नथवानी ने इस जोड़ी के निधन पर गहरी संवेदना जताई। उन्होंने कहा, 'जय के निधन से मैं बहुत दुखी हूं। जय और वीरू की जोड़ी को देखने या उनकी कहानियां सुनने वाले हर वन्यजीव प्रेमी के लिए यह नुकसान व्यक्तिगत है। हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी गिर में इनके शाही अंदाज को देखा था।'





