
केरल: महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केरल सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने तिरुवनंतपुरम में महिलाओं के लिए विशेष ‘पिंक बस - लेडीज ओनली’ सेवा की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं के लिए सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और भरोसेमंद बनाना है। सरकार का मानना है कि इस सेवा से खासतौर पर उन महिलाओं को राहत मिलेगी, जिन्हें देर रात या काम के समय आने-जाने में सुरक्षा संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
इस विशेष बस सेवा का शुभारंभ 23 जुलाई को तिरुवनंतपुरम सेंट्रल डिपो से किया गया। मंत्री सीपी जॉन ने हरी झंडी दिखाकर पिंक बस को रवाना किया। यह योजना राज्य सरकार के 100 दिन के एक्शन प्लान का हिस्सा है। शुरुआत में इस सेवा को तिरुवनंतपुरम में शुरू किया गया है और यात्रियों की प्रतिक्रिया तथा जरूरतों को देखते हुए इसे भविष्य में अन्य जिलों तक विस्तार देने की योजना बनाई जा रही है।
पिंक बस सेवा की सबसे खास बात यह है कि इसमें केवल महिला यात्रियों को सफर की अनुमति होगी। शुरुआती चरण में रात के समय विशेष बसों का संचालन किया जाएगा। रात 8 बजे और रात 10 बजे चलने वाली इन बसों का उद्देश्य उन महिलाओं की मदद करना है, जो देर रात तक काम करती हैं। खासतौर पर टेक्नोपार्क जैसे बड़े आईटी हब में काम करने वाली महिला कर्मचारियों को इस सेवा से फायदा मिलने की उम्मीद है।
केरल सरकार का कहना है कि इस बस सेवा को केवल परिवहन सुविधा बढ़ाने के लिए शुरू नहीं किया गया है, बल्कि महिलाओं की यात्रा से जुड़ी वास्तविक समस्याओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। सरकार यात्रियों की मांग, रूट और समय की जरूरतों का अध्ययन करने के बाद सेवा का विस्तार करेगी। भविष्य में ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा और इलेक्ट्रिक बसों के इस्तेमाल पर भी विचार किया जा रहा है।
देश के कई हिस्सों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सार्वजनिक परिवहन में भीड़, छेड़छाड़, अभद्र व्यवहार और खराब रोशनी वाले बस स्टॉप जैसी समस्याएं आज भी कई महिलाओं के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं। कई महिलाएं मजबूरी में देर रात सफर करने से बचती हैं, खासकर वे महिलाएं जो आईटी, हेल्थकेयर, हॉस्पिटैलिटी, रिटेल और अन्य क्षेत्रों में नौकरी करती हैं।
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में सार्वजनिक परिवहन को सुरक्षित बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। बसों और मेट्रो में सीसीटीवी कैमरे, जीपीएस ट्रैकिंग, महिला हेल्पलाइन और सुरक्षा कर्मचारियों की तैनाती जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। इसके बावजूद कई जगहों पर महिलाओं को पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं होता। ऐसे में पिंक बस जैसी सेवाएं महिलाओं को अतिरिक्त सुरक्षा का भरोसा देने का काम कर सकती हैं।
केरल ऐसा पहला राज्य नहीं है, जहां महिलाओं के लिए विशेष परिवहन सेवा शुरू की गई है। इससे पहले देश के कई शहरों में महिलाओं के लिए अलग बसें और मेट्रो में अलग कोच की व्यवस्था की जा चुकी है। दिल्ली समेत कई राज्यों ने भी महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसी योजनाओं की घोषणा की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल महिलाओं के लिए अलग परिवहन व्यवस्था स्थायी समाधान नहीं है, लेकिन यह महिलाओं को सुरक्षित यात्रा का विकल्प जरूर प्रदान करती है। असली लक्ष्य ऐसा सार्वजनिक परिवहन तंत्र बनाना होना चाहिए, जहां महिलाएं बिना डर के किसी भी समय यात्रा कर सकें।
केरल सरकार की पिंक बस सेवा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अगर यह योजना सफल होती है तो आने वाले समय में इसे राज्य के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जा सकता है। इससे न केवल महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि रोजगार और शिक्षा के अवसरों तक उनकी पहुंच भी आसान हो सकेगी।





