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हत्या मामले में जज की पत्नी और बेटों को हुई उम्रकैद की सजा

Nilmani Pal
15 May 2025 6:52 AM IST
हत्या मामले में जज की पत्नी और बेटों को हुई उम्रकैद की सजा
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यूपी। कानपुर में 18 साल पहले हुई हत्या के मामले में अदालत ने दिवंगत जज शिवबरन सिंह की पत्नी और दो पुत्रों को बुधवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। तीनों पर ढाई-ढाई लाख रुपए का जुर्माना भी किया। हत्या 29 अप्रैल 2007 को घाटमपुर कोतवाली क्षेत्र के बेहटा बुजुर्ग गांव में हुई थी, जिसमें कई जिलों में एडीजे रहे शिवबरन समेत उनका परिवार नामजद किया गया था।

बेहटा बुजुर्ग गांव निवासी वीरेंद्र सिंह का किदवईनगर, कानपुर निवासी पारिवारिक चाचा सेवानिवृत्त एडीजे शिवबरन सिंह से संपत्ति विवाद चल रहा था। गांव में मकान के निकास को लेकर शुरू हुआ यह विवाद 29 अप्रैल 2007 को खूनी वारदात में बदल गया। उस दिन कानपुर से बेहटा गांव पहुंचे शिवबरन सिंह और वीरेंद्र सिंह के बीच विवाद हो गया। शिवबरन, उनके बेटों और परिजनों ने वीरेंद्र पर धारदार औजार व लाठी-डंडों से हमला कर दिया। हमले में वीरेंद्र की मौत हो गई थी, जबकि बचाने में छुट्टी पर आया उनका फौजी पुत्र नवनीत सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया। इस मामले में वीरेंद्र के दूसरे बेटे विशाल ने शिवबरन सिंह, उनके पुत्र यशोवर्धन और जयवर्धन, पत्नी नीलम व बहू शीलू पत्नी जयवर्धन के खिलाफ घाटमपुर कोतवाली में हत्या, हत्या के प्रयास आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। इस मुकदमे की सुनवाई एडीजे कोर्ट संख्या-6 में चल रही थी। सुनवाई के दौरान शिवबरन की मौत हो गई। नौ मई को सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने जयवर्धन, यशोवर्धन और मां नीलम को दोषी करार दिया था। जबकि साक्ष्य के अभाव में बहू शीलू को दोषमुक्त कर दिया।

एडीजीसी विवेक त्रिपाठी ने बताया कि बुधवार को मामले में अभियोजन व बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने दोषी नीलम देवी, यशोवर्धन और जयवर्धन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही तीनों पर ढाई-ढाई लाख रुपये का जुर्माना भी किया। उन्होंने बताया कि जुर्माने की 75 फीसदी धनराशि पीड़ित के निकटतम परिजनों को दिए जाने तथा जुर्माना अदा न करने पर तीनों को एक साल के अतिरिक्त कारावास का भी आदेश किया गया है।

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