झारखंड सरकार झुकी, 4 मंत्रियों का प्रतिनिधिमंडल का स्पाट मीटिंग

14 दिनों के छात्र आंदोलन में आई तेजी बात मनाने वाला चाहिए, मानती है सरकारें
बिना कॉकरोचो की ठेकेदारी, बिना गाली, हुल्लड़ के छात्र आंदोलन रांची में सफलता की ओर
कॉकरोचों के बिना ही आंदोलन चलेगा (कोड आफ कंडक नियम की पोस्टर स्पष्ट रुप से आंदोलन स्थल में लगाए गए)
मंच से किसी भी प्रकार का राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक व जातिगत और उग्र भाषण नहीं होगा
आंदोलन के मूल उद्देश्यों पर ही अपनी बात रखना है, गैर आंदोलित बातें नहीं की जाएगी
हमारी लड़ाई सिस्टम से है, और सिस्टम की व्यवस्था सुधारना हमारा उद्देश्य
मंच से किसी को भी आरोपित न करें, और किसी भी राजनीतिक दल को टार्गेट नहीं किया जाएगा
किसी भी राजनीतिक नेता या कॉकरोच नेता को, आंदोलन की नेतृत्व करने की या हाईजेक करने की इजाजत नहीं
रांची के स्थानीय नेता को आंदोलन स्थल से छात्रों ने खदेड़ा।
खबर है कि वे अपना समर्थन देने छात्रों के आंदोलन में शामिल होने गए थे लेकिन छात्रों ने उनके पूछताछ की फिर पता चला कि वे
किसी राजनीतिक दल से संबंध रखते हैं तो छात्र उग्र होकर अंकल वापस जाओ के नारे लगाकर खदेड़ा।
रांची (ए/जसेरि)। झारखंड में झारखंड लोक सेवा आयोग की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में गड़बडिय़ों को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज होता जा रहा है। लगातार प्रदर्शन के बीच हेमंत सोरेन सरकार दबाव में दिख रही है। सरकार ने प्रोटेस्ट कर रहे छात्रों से बातचीत के लिए चार मंत्रियों का एक प्रतिनिधिमंडल
गठित किया है। हालांकि छात्रों की मांग है कि वह सीधे सीएम से ही बात करेंगे। बहुत संभावना है कि मंत्रियों का दल गुरुवार को धरना स्थल पर पहुंचकर छात्रों से बातचीत करेगा। सरकारी सूत्रों के मुताबिक अगर धरना स्थल पर बातचीत नहीं हो पाई तो किसी सार्वजनिक स्थान पर छात्र प्रतिनिधियों को बुलाया जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार, छात्रों के बढ़ते विरोध को देखते हुए सरकार परीक्षा के रिजल्ट को भी रद्द करने के विकल्प पर भी गंभीरता से विचार कर रही है। सूत्रों का कहना है कि सरकार के स्तर पर इस मुद्दे पर चर्चा चल रही है और जल्द ही कोई अहम फैसला लिया जा सकता है। इस बीच कल्याण मंत्री लिंडा ने कहा कि सरकार ने बातचीत के लिए छात्र प्रतिनिधियों को बुलाया है। हालांकि, छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे बंद कमरे में बातचीत नहीं करेंगे। उनकी मांग है कि मु यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं उनसे बातचीत करें। साथ ही वार्ता के दौरान कम से कम दो मीडिया प्रतिनिधियों की मौजूदगी हो और पूरी बातचीत सार्वजनिक रूप से हो, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। सरकारी पक्ष से भी संकेत मिले हैं कि बातचीत किसी सार्वजनिक स्थान पर कराई जा सकती है।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा, कल रात हमारी बैठक में यह फैसला हुआ कि हम सरकार से बातचीत के लिए जाएंगे, हालांकि समय अभी तय नहीं हुआ है। लेकिन हमारी एक और मांग है। अगर मु यमंत्री हमसे खुले मंच पर, मीडिया के सामने लाइव बातचीत करने को तैयार हैं, तो किसी ठोस समाधान पर पहुंचा जा सकता है।
उन्होंने कहा, हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि पिछले आंदोलनों में हमारे कुछ साथियों को बंद कमरे में बातचीत के लिए ले जाया गया था, लेकिन उसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। हमें लग रहा है कि इस बार भी वैसी ही कोशिश की जा रही है। सरकार पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को बुला रही है, लेकिन ऐसा लगता है कि यह सिर्फ मामले को टालने या आंदोलन को खत्म करने की कोशिश है। प्रदर्शनकारी ने कहा, हम ऐसा नहीं चाहते। हमारी सिर्फ इतनी मांग है कि अगर मु यमंत्री बात करना चाहते हैं तो खुले मंच पर आएं। हम उसका स्वागत करेंगे। वे कैमरे के सामने जो कहना चाहें कहें। अगर उनका प्रस्ताव हमें स्वीकार होगा तो हम मान लेंगे, नहीं होगा तो स्वीकार नहीं करेंगे।
उधर, छ्वक्कस्ष्ट परीक्षा में कथित धांधली की जांच कर रही झारखंड सीआईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिर तार किया है। रांची और उत्तर प्रदेश के लखनऊ पुलिस के सहयोग से की गई इस कार्रवाई में उमाकांत उरांव, रोशन केरकेट्टा, मनोज कुमार, रक्षक सिंह और धर्मेंद्र कुमार को गिर तार किया गया है।
सीआईडी के अनुसार, उमाकांत उरांव पर 14वीं छ्वक्कस्ष्ट प्रारंभिक परीक्षा में धोखाधड़ी और अनुचित साधनों का इस्तेमाल कर उत्तीर्ण होने के साथ-साथ अन्य अ यर्थियों को उपलब्ध कराने के लिए एजेंट के रूप में काम करने का आरोप है। रोशन केरकेट्टा और मनोज कुमार पर भी परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग कर सफल होने का आरोप है। गिर तार आरोपी रक्षक सिंह उत्तर प्रदेश के लखनऊ का रहने वाला है और छ्वक्कस्ष्ट परीक्षा आयोजित करने वाली कंपनी ञ्जष्ठक्करु में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत है। जांच एजेंसी का आरोप है कि उसने भी परीक्षा में धोखाधड़ी और अनुचित साधनों का इस्तेमाल किया। वहीं धर्मेंद्र कुमार को भी इस मामले में गिर तार किया गया है। सीआईडी फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है और पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है।
छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर सरकार संवाद के जरिए गतिरोध खत्म करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में अब सबकी नजर सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच प्रस्तावित वार्ता तथा छ्वक्कस्ष्ट परीक्षा परिणामों पर सरकार के संभावित फैसले पर टिकी हुई है।
आंदोलित छात्रों ने सोशल मीडिया पोस्ट में ऐसा लिखा.ठ्ठ नेहा बोरा 7 अगस्त को झारखंड के रांची में होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने जा रही हैं। झारखंड के कुछ छात्रों का आरोप है कि अगर उन्होंने प्रदर्शन को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश की या किसी धर्म के खिलाफ नारे लगाए, तो वे इसका विरोध करेंगे। किसी भी असहमति का जवाब हिंसा से नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाना चाहिए।
ठ्ठ धीरे-धीरे वामपंथी झारखंड के छात्र आंदोलन में घुस आए हैं। जंतर- मंतर वाला सपोर्ट सिस्टम इस आंदोलन को बदनाम करने के लिए आ रहा है। ये सब विवादित नारे भी लगाएंगे, छात्रों को जाति-धर्म आदि के नाम पर बांटेंगे भी। अभिजीत दीपके, नेहा बोरा जैसों का बायकॉट करो, वरना ये आंदोलन की पवित्रता को भंग कर देंगे। झारखंड के छात्र सिर्फ टाइगर हैं, यहां कोई तिलचट्टा या छ्वहृ वाला नहीं चलेगा।





