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IPS अफसर पर वसूली का आरोप, कांस्टेबल के वीडियो ने पुलिस विभाग में मचा दी खलबली

Nilmani Pal
8 May 2026 6:16 AM IST
IPS अफसर पर वसूली का आरोप, कांस्टेबल के वीडियो ने पुलिस विभाग में मचा दी खलबली
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लखनऊ। लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में तैनात हर सिपाही से 2000 रुपए की वसूली हो रही है। यहीं पर तैनात एक कांस्टेबल ने यह आरोप लगाते हुए वीडियो जारी किया है। वीडियो को कांग्रेस समेत तमाम सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर शेयर किया जा रहा है। वीडियो ने पूरे लखनऊ पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है। करीब तीन मिनट के इस वीडियो में सिपाही ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उसका आरोप है कि आईपीएस अफसर पूरा नेटवर्क चला रहे हैं। एक चैनल बनाकर उन तक वसूली की यह रकम भेजी जा रही है। अधिकारी इस लूट की जमींदारी व्यवस्था चला रहे हैं।

लखनऊ रिजर्व पुलिस लाइंस में तैनात कांस्टेबल सुनील कुमार शुक्ला का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है। वीडियो में कांस्टेबल दावा कर रहा है कि पुलिस लाइन में ड्यूटी लगाने के नाम पर जवानों से हर महीने 2000 रुपये की वसूली होती है और यह पैसा नीचे से ऊपर तक अधिकारियों में बांटा जाता है। इतना ही नहीं वीडियो में काले अंग्रेजों का जिक्र करते हुए कांस्टेबल ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर ही गंभीर सवाल उठा दिए हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई है। कांस्टेबल सुनील कुमार शुक्ला अपने वायरल वीडियो में कह रहा है कि मेरी नियुक्ति लखनऊ कमिश्नरेट के रिजर्व पुलिस लाइन में है। मैं लखनऊ कमिश्नरेट और उत्तर प्रदेश के अन्य जनपदों में इन काले अंग्रेज अर्थात आईपीएस अधिकारियों द्वारा चलाई जा रही भ्रष्टाचार रूपी जमींदारी व्यवस्था पर प्रदेश के लोकतांत्रिक राजा और प्रदेश के मुखिया माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं।

कांस्टेबल कहता है कि मुख्यमंत्री जी लखनऊ कमिश्नरेट के रिजर्व पुलिस लाइन यानी आपकी नाक के नीचे इन काले अंग्रेज अर्थात आईपीएस अधिकारियों द्वारा लूट की जमींदारी व्यवस्था चलाई जा रही है। आपके द्वारा नियुक्त सिपाही दीवान बेचारा लूटा जा रहा है। यह व्यवस्था पूरी सुनियोजित सुव्यवस्थित ढंग से चलाई जा रही है। कांस्टेबल बताता है कि वसूली की राशि नीचे से ऊपर पहुंचाने के लिए एक चैनल बनाया गया है। आईपीएस अफसर आरआई को नियुक्त कर रहे हैं। आरआई एक गणना प्रभारी को तैनात कर रहा है और गणना प्रभारी अपनी सुविधा के लिए गार्दों एक गार्द कमांडर नियुक्त करता है। अब बारी सिपाही दीवान की आती है। सिपाही दीवान अपनी ड्यूटी लगवाने के लिए गार्दों में 2000 प्रतिमाह दे रहे हैं। बेचारा गार्द कमांडर पैसा भी इकट्ठा करता है और अपने को बचा भी नहीं पाता है। उसे भी 2000 प्रति महीना की दर से जमा करना पड़ता है। कांस्बेटल आगे कहता है कि यह सारे पैसे को गणना प्रभारी के पास जमा कराया जाता है। गणना प्रभारी अपना हिस्सा काटकर आरआई को दे देता है। आरआई अपना हिस्सा काटकर उच्च अधिकारियों के पहुंचा देते हैं।

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