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Indigo ऑपरेशनल संकट: उड़ानों में 10% कटौती का सरकारी आदेश जारी
Shantanu Roy
9 Dec 2025 7:52 PM IST

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New Delhi. नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन इंडिगो पिछले एक सप्ताह से चल रहे बड़े ऑपरेशनल संकट के बीच मंगलवार को एक बड़े सरकारी दबाव का सामना करती नजर आई। एयरलाइन के CEO पीटर एल्बर्स को नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) के मुख्यालय में तलब किया गया, जहां वे उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू और मंत्रालय के सचिव समीर सिन्हा के सामने हाथ जोड़ते दिखाई दिए। इस महत्वपूर्ण बैठक में उड़ानों की देरी, कैंसिलेशन, यात्रियों की देखभाल, रिफंड प्रक्रिया, बैगेज की स्थिति, और क्रू मैनेजमेंट जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक के बाद केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए इंडिगो को अपने ऑपरेशंस में 10% कटौती करने का आदेश दिया, ताकि उड़ानों की कैंसिलेशन और देरी की घटनाओं पर नियंत्रण पाया जा सके। मंत्रालय का साफ संदेश था कि देश की सबसे बड़ी एयरलाइन होने के बावजूद यात्रियों को परेशानी में डालने की अनुमति किसी को नहीं है।
ऑपरेशनल संकट पर इंडिगो की सफाई
बैठक से पहले इंडिगो ने एक आधिकारिक बयान जारी कर दावा किया कि पिछले एक हफ्ते से जारी संकट अब लगभग समाप्त हो चुका है। एयरलाइन ने कहा कि सभी उड़ानें सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं। ऑन-टाइम परफॉर्मेंस वापस सामान्य स्तर पर लौट आया है। बुधवार को लगभग 1900 उड़ानें संचालित करने की योजना है। 138 स्टेशनों पर कंपनी 1800 से अधिक उड़ानें पहले ही चला रही है। एयरपोर्ट पर फंसे लगभग सभी बैग यात्रियों तक पहुंचाए जा चुके हैं। बाकी बैगेज जल्द ही वितरित कर दिया जाएगा। कैंसिलेशन पर फुल रिफंड की ऑटोमेटेड प्रक्रिया वेबसाइट पर शुरू कर दी गई है। CEO पीटर एल्बर्स ने कहा कि 5 दिसंबर को संकट अपने चरम पर था, जब एयरलाइन केवल 700 फ्लाइट्स ही ऑपरेट कर सकी। उन्होंने वीडियो संदेश के माध्यम से यात्रियों से खेद व्यक्त करते हुए कहा कि सभी रूट्स पर उड़ानें अब स्थिर हो चुकी हैं।
सरकार की कड़ी कार्रवाई: क्यों लगा 10% कट का आदेश?
सूत्र बताते हैं कि मंत्रालय लाखों यात्रियों को हो रही असुविधा से बेहद नाराज था। कई एयरपोर्ट्स पर बैगेज जमा होने, उड़ानों के घंटों तक लेट होने और रिफंड में देरी ने यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी थी। इसी के चलते नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इंडिगो को अपने ऑपरेशंस में 10 प्रतिशत कमी लाने का निर्देश दिया है, ताकि एयरलाइन अपनी क्षमता के हिसाब से परिचालन को संतुलित कर सके।
लोकसभा में उड्डयन मंत्री का सख्त बयान
संकट को लेकर लोकसभा में भी मामला उठा। उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने स्पष्ट शब्दों में कहा- “इंडिगो को नए FDTL नियमों में किसी तरह की विशेष छूट नहीं दी जाएगी।” “एयरलाइन कितनी भी बड़ी क्यों न हो, वह यात्रियों को परेशान नहीं कर सकती।” “देश में नई घरेलू एयरलाइनों को जगह देने का समय आ गया है, क्योंकि इंडिगो का मार्केट शेयर लगभग 65% है।” उन्होंने कहा कि बड़ी कंपनियां अपनी वर्चस्व स्थिति का गलत लाभ नहीं उठा सकतीं, और मंत्रालय यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा।
FDTL नियमों पर विवाद और DGCA की भूमिका
इंडिगो ने संकट की वजह बताने के लिए मंत्रालय को एक रिपोर्ट भेजी थी जिसमें कहा गया। नए FDTL (Flight Duty Time Limitation) नियमों तकनीकी खामियां शीतकालीन शेड्यूल में बदलाव खराब मौसम की वजह से फ्लाइट ऑपरेशंस प्रभावित हुए। हालांकि, DGCA द्वारा अस्थायी रूप से FDTL नियमों में दी गई छूट को विपक्ष और एविएशन एक्सपर्ट्स ने आलोचना का विषय बनाया। मंत्री ने स्पष्ट किया कि आगे से किसी भी एयरलाइन को उसके आकार के आधार पर कोई विशेष छूट नहीं दी जाएगी।
इंडस्ट्री पर असर और यात्रियों की उम्मीदें
एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंडिगो पर सरकारी दबाव बढ़ने से यात्रियों के अधिकारों की सुरक्षा होगी। टिकट कैंसिलेशन, बैगेज और रिफंड जैसी सेवाएं बेहतर होगी। एयरलाइन अपने क्रू और ऑपरेशनल मैनेजमेंट को सुधारने के लिए मजबूर होगी। हालांकि, 10% कटौती से कुछ रूट्स पर फ्लाइट्स कम हो सकती हैं और टिकट कीमतों में अस्थाई बढ़ोतरी की संभावना भी है। इंडिगो का यह संकट भारत के एविएशन सेक्टर के लिए एक बड़ा संकेत है कि किसी भी एयरलाइन का बाजार पर कब्जा, खराब प्रबंधन, रिफंड और बैगेज में लापरवाही सरकार के लिए अब अस्वीकार्य है। उड्डयन मंत्री के सख्त संदेश और मंत्रालय के हस्तक्षेप से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में इंडिगो पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी, ताकि यात्रियों को परेशानी से बचाया जा सके। एयरलाइन ने भले ही संकट खत्म होने का दावा किया हो, लेकिन अब उसकी विश्वसनीयता की वास्तविक परीक्षा शुरू होती है।
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