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Middle East संकट का भारत पर असर

Saba Naaz
13 July 2026 7:31 PM IST
Middle East संकट का भारत पर असर
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नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर दिखाई देने लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। सोमवार को क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 3.68 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और कीमत 74 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। वहीं, ब्रेंट क्रूड भी लगभग 4 प्रतिशत बढ़कर 79 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया।

कच्चे तेल की कीमतों में इस तेजी ने भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर देश के आयात बिल और ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल स्थिति पर नजर रखने की जरूरत है। यदि ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रहती है तो भारत पर इसका असर सीमित रह सकता है। हालांकि, यदि तनाव बढ़ता है और तेल आपूर्ति प्रभावित होती है तो कीमतों में और तेजी आ सकती है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बाजार की नजर

मध्य पूर्व संकट के बीच सबसे बड़ी चिंता तेल आपूर्ति को लेकर बनी हुई है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर किसी तरह का व्यवधान आता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की सप्लाई होती है। किसी भी तरह की रुकावट से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में अचानक उछाल आ सकता है।

कमोडिटी और करेंसी रिसर्च विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा तेजी मुख्य रूप से भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण है। बाजार अभी यह आंकलन कर रहा है कि तनाव कितना बढ़ता है और इसका तेल आपूर्ति पर कितना प्रभाव पड़ता है।

भारत पर कितना पड़ेगा असर?

भारत दुनिया के बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से देश के आयात खर्च में वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा रुपये की कीमत और वैश्विक बाजार की स्थिति भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों को प्रभावित करती है।

हालांकि, घरेलू ईंधन कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय क्रूड कीमतों पर निर्भर नहीं करतीं। इसमें टैक्स, रिफाइनिंग लागत, मुद्रा विनिमय दर और तेल कंपनियों की मूल्य नीति जैसे कई अन्य कारक भी शामिल होते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका असर महंगाई पर भी पड़ सकता है। परिवहन लागत बढ़ने से कई वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि की संभावना रहती है।

अभी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं बाजार

फिलहाल तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। निवेशक मध्य पूर्व की घटनाओं पर नजर रख रहे हैं और आगे की दिशा का अनुमान लगा रहे हैं। अगर तनाव सीमित रहता है तो कीमतों में स्थिरता आ सकती है, लेकिन स्थिति बिगड़ने पर कच्चे तेल में और तेजी देखने को मिल सकती है।

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर अभी कोई तत्काल बदलाव नहीं हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक हालात के आधार पर ही आगे की तस्वीर साफ होगी।

मध्य पूर्व तनाव ने एक बार फिर यह दिखाया है कि वैश्विक घटनाओं का सीधा असर ऊर्जा बाजार और उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है। फिलहाल भारत समेत दुनिया भर के बाजार कच्चे तेल की चाल पर नजर बनाए हुए हैं।

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