
कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 'असली' होने को लेकर चल रहे विवाद के बीच पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर बागी गुट को और समय देने का विरोध किया है। ममता ने आरोप लगाया है कि आयोग की चुप्पी के कारण बागी गुट को अनावश्यक राहत मिल रही है और मामले को लंबा खींचने का अवसर मिल रहा है।
ममता बनर्जी ने अपने पत्र में चुनाव आयोग से मांग की है कि ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय न दिया जाए। उनका कहना है कि आयोग द्वारा तय की गई समय सीमा समाप्त हो चुकी है, इसके बावजूद कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है।
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के संगठन और पार्टी की वास्तविक पहचान को लेकर विवाद उस समय शुरू हुआ, जब ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले एक गुट ने चुनाव आयोग में याचिका दाखिल की। इस गुट ने दो जुलाई को आयोग के समक्ष खुद को 'असली' तृणमूल कांग्रेस बताते हुए पार्टी के रूप में मान्यता देने की मांग की थी।
बागी गुट ने अपनी याचिका में 22 जून को हुई विशेष बैठक में किए गए संगठनात्मक बदलावों को भी मान्यता देने की मांग की थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया था। आयोग ने जवाब दाखिल करने के लिए छह जुलाई शाम 5.30 बजे तक का समय निर्धारित किया था।
ममता बनर्जी का कहना है कि बागी गुट के दावे निराधार हैं और पार्टी के संगठनात्मक फैसलों को चुनौती देने का कोई आधार नहीं है। उन्होंने आयोग से जल्द निर्णय लेने की अपील की है, ताकि पार्टी की स्थिति को लेकर बनी असमंजस की स्थिति खत्म हो सके।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समयसीमा खत्म होने के बाद भी यदि बागी गुट को अतिरिक्त अवसर दिया जाता है तो इससे प्रक्रिया में अनावश्यक देरी होगी। ममता गुट का मानना है कि पार्टी की आधिकारिक पहचान और संगठनात्मक अधिकारों को लेकर जल्द स्पष्टता जरूरी है।
वहीं, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट अपने दावे पर कायम है। गुट का कहना है कि संगठन में हुए बदलावों और पार्टी के संचालन से जुड़े मुद्दों को लेकर उसका पक्ष उचित है। इसी आधार पर उसने चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग की है।
इस पूरे मामले में चुनाव आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि किसी राजनीतिक दल की आधिकारिक पहचान और संगठनात्मक अधिकारों को लेकर अंतिम फैसला आयोग की प्रक्रिया के तहत ही होता है। दोनों पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों की जांच के बाद ही आयोग आगे की कार्रवाई करेगा।
तृणमूल कांग्रेस बंगाल की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों में शामिल है और ममता बनर्जी लंबे समय से पार्टी की सबसे प्रमुख नेता रही हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर चल रहा यह विवाद राजनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है।
अब सभी की नजर चुनाव आयोग के अगले कदम पर है। आने वाले दिनों में आयोग की सुनवाई और फैसले से यह स्पष्ट होगा कि तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक अधिकारों को लेकर विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।





