
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने ग्रीन एनर्जी की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल-पावर्ड पैसेंजर ट्रेन की शुरुआत कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई को इस अत्याधुनिक ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। शुरुआत के महज पांच दिनों में ही इस हाइड्रोजन ट्रेन ने करीब 900 किलोमीटर का सफर पूरा कर लिया है। फिलहाल यह ट्रेन हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाई जा रही है।
हाइड्रोजन ट्रेन को भारतीय रेलवे के भविष्य की हरित परिवहन व्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है। यह ट्रेन डीजल इंजन पर निर्भर नहीं है, बल्कि हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से संचालित होती है। रेलवे का उद्देश्य उन रूटों पर प्रदूषण मुक्त ट्रेन सेवा उपलब्ध कराना है, जहां पूरी तरह से इलेक्ट्रिफिकेशन करना मुश्किल है।
इस ट्रेन में दो 1,200 किलोवाट के हाइड्रोजन-इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम लगाए गए हैं। ट्रेन में मौजूद फ्यूल सेल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को मिलाकर बिजली तैयार करते हैं। इसी बिजली से ट्रेन का इंजन चलता है। इस प्रक्रिया में पारंपरिक डीजल ट्रेनों की तुलना में प्रदूषण काफी कम होता है और कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिलती है।
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को जींद-सोनीपत कॉरिडोर पर चलाने का फैसला इसलिए किया गया है ताकि इसके संचालन, रखरखाव और तकनीकी क्षमता का परीक्षण किया जा सके। रेलवे को उम्मीद है कि इस पायलट प्रोजेक्ट से भविष्य में देश के अन्य हिस्सों में भी हाइड्रोजन आधारित ट्रेनों के संचालन का रास्ता साफ होगा।
यह ट्रेन नॉर्दर्न रेलवे के अंतर्गत चलाई जा रही है। इसमें करीब 2,600 यात्रियों के बैठने की क्षमता है। ट्रेन में 10 कोच लगाए गए हैं। इसकी डिजाइन स्पीड 110 किलोमीटर प्रति घंटा है, हालांकि फिलहाल जींद-सोनीपत रूट पर यह अधिकतम 75 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही है।
हाइड्रोजन ट्रेन के किराये को लेकर भी यात्रियों में काफी उत्सुकता है। रेलवे ने इस ट्रेन का किराया सामान्य डीजल मल्टीपल यूनिट यानी DMU ट्रेन के बराबर ही रखा है। यात्रियों को इस आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल ट्रेन में सफर करने के लिए ज्यादा पैसे खर्च नहीं करने होंगे। इसका किराया दूरी के हिसाब से 5 रुपये से लेकर 25 रुपये तक रखा गया है।
जींद सिटी से पांडु पिंडारा तक यात्रा करने पर किराया 5 रुपये है। वहीं जींद से भंभेवा तक का किराया 10 रुपये निर्धारित किया गया है। जींद से गोहाना तक सफर के लिए यात्रियों को 15 रुपये देने होंगे। इसके अलावा जींद से मोहाना तक का किराया 20 रुपये और जींद से सोनीपत तक यात्रा करने का किराया 25 रुपये रखा गया है।
हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन के लिए जींद में विशेष हाइड्रोजन स्टोरेज और रीफ्यूलिंग सुविधा भी तैयार की गई है। इससे ट्रेन को नियमित रूप से हाइड्रोजन ईंधन उपलब्ध कराया जा सकेगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना भारत को स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन व्यवस्था की ओर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में हाइड्रोजन ट्रेनें उन इलाकों में उपयोगी साबित हो सकती हैं, जहां रेलवे लाइनों का विद्युतीकरण आर्थिक या तकनीकी रूप से कठिन है। इससे न केवल डीजल पर निर्भरता कम होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
भारत में हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत रेलवे के आधुनिकीकरण और हरित परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। आने वाले वर्षों में इस तकनीक का विस्तार होने पर देश में प्रदूषण मुक्त रेल यात्रा को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।





