
पानीपत। हरियाणा के पानीपत जिले से इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक घटना में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं फास्ट ट्रैक कोर्ट (पॉक्सो) के न्यायाधीश पीयूष शर्मा की अदालत ने पांच वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के आरोपी कृष्ण को दोषी ठहराते हुए 40 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 55 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसे पीड़िता को देने के सख्त आदेश दिए गए हैं।
यह फैसला दो साल पुरानी उस दर्दनाक घटना पर आया है, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया था। अदालत के इस कड़े रुख से समाज में एक कड़ा संदेश गया है कि मासूमों के खिलाफ यौन अपराध करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
क्या था पूरा मामला?
मामला पानीपत जिले के मतलौडा थाना क्षेत्र का है। 27 नवंबर 2024 को पीड़िता के पिता ने थाने में जाकर आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, पीड़ित परिवार की पांच वर्षीय मासूम बेटी अपने घर के बाहर गली में अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी।
उसी दौरान उनका पड़ोसी कृष्ण वहां आया। उसने बच्ची की मासूमियत का फायदा उठाया और उसे ₹20 का नोट दिखाकर 'चीज' (खाने-पीने का सामान) दिलाने का झांसा दिया। लालच में आकर बच्ची आरोपी के साथ चली गई। आरोपी उसे बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया और वहां उसके साथ दरिंदगी (गलत काम) की।
बच्ची ने रोते हुए बयां की थी आपबीती
वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने बच्ची को छोड़ दिया। बच्ची रोती-बिलखती और डरी-सहमी हुई अपने घर पहुंची। जब माता-पिता ने बच्ची को इस हालत में देखा और रोने का कारण पूछा, तो मासूम ने आरोपी कृष्ण की करतूत के बारे में परिजनों को बताया।
मासूम की बात सुनकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। वे तुरंत बच्ची को लेकर स्थानीय पुलिस स्टेशन पहुंचे और पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी।
त्वरित पुलिस कार्रवाई और मेडिकल जांच
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मतलौडा थाना पुलिस ने बिना किसी देरी के त्वरित कार्रवाई की:
पुलिस ने सबसे पहले मासूम बच्ची को अस्पताल ले जाकर उसका मेडिकल परीक्षण करवाया, जिसमें दुष्कर्म की पुष्टि हुई।
परिजनों के विस्तृत बयानों के आधार पर पुलिस ने पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।
केस दर्ज होते ही पुलिस टीम ने दबिश देकर आरोपी कृष्ण को गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में चली सुनवाई
केस की संवेदनशीलता और पीड़िता की उम्र को ध्यान में रखते हुए इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट (POCSO) में भेजा गया। अभियोजन पक्ष (सरकारी वकील) ने अदालत के सामने मजबूत साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान प्रस्तुत किए।
अदालत में केस की सुनवाई के दौरान यह साबित हो गया कि कृष्ण ने एक छिछोरी मानसिकता के तहत पड़ोस की ही मासूम बच्ची के विश्वास को छलते हुए इस घिनौने अपराध को अंजाम दिया था।
अदालत का फैसला: 40 साल की सजा और जुर्माना
दोनों पक्षों की दलीलें और सबूतों का अध्ययन करने के बादFast Track Court के न्यायाधीश पीयूष शर्मा की अदालत ने वीरवार को अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने माना कि दोषी ने जो अपराध किया है, वह बेहद घिनौना और अक्षम्य है।
अदालत के फैसले के मुख्य बिंदु:
सजा: दोषी कृष्ण को 40 वर्ष के सश्रम (कठोर) कारावास की सजा।
जुर्माना: दोषी पर 55,000 रुपये का आर्थिक जुर्माना।
मुआवजा: जुर्माने की पूरी राशि पीड़िता के पुनर्वास और सहायता के लिए उसे देने के निर्देश दिए गए हैं।
न्यायालय के इस फैसले से पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है। कानून के जानकारों का मानना है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा इस तरह की सख्त और त्वरित सजा सुनाने से अपराधियों में खौफ पैदा होगा और समाज में मासूमों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में यह फैसला एक मिसाल साबित होगा।





