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Mataur. मटौर। हिमाचल की लाइफलाइन कहलाने वाली एचआरटीसी का जल्द कायाकल्प होने जा रहा है। परिवहन निगम के बेड़े में जगह बनाने वाली 700 नई बसें घाटे से निरंतर जूझ रही कार्पोरेशन की कहानी कुछ इस अंदाज में लिखने जा रही हैं कि न केवल लोगों का सफर यादगार बनेगा, बल्कि कर्मचारियों-पेंशनरों की दिक्कतें भी दूर होती जाएंगी। यह मानना है एचआरटीसी के वाइन पे्रसिडेंट और हिमाचल कांग्रेस के महासचिव अजय वर्मा का। ‘दिव्य हिमाचल’ से विशेष बातचीत में श्री वर्मा ने विस्तार से जानकारी दी कि उनके विश्वास का आधार आखिर है क्या।
लगभग एक महीने में एचआरटीसी का हिस्सा बनने वाली इलेक्ट्रिक बसों में से प्रत्येक हर महीने लगभग तीन लाख रुपए का डीजल बचाएगी। यही नहीं, एक करोड़ 72 लाख में आने वाली ऐसी हर बस के रखरखाव का सारा जिम्मा 12 साल तक निर्माता कंपनी उठाएगी। 200 बसों के हिसाब से हर महीने 45 करोड़ रुपए डीजल के बचेंगे, जो परिवहन निगम को घाटे से ही नहीं उबारेंगे, बल्कि कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन के भुगतान को भी पहली तारीख के पास लाते जाएंगे। 300 डीजल और 100 मिडी बसें भी एचआरटीसी की धमनियों में नए रक्त का संचार करेंगी।
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