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Shimla. शिमला। इस बार मानसून सीजन ने हिमाचल प्रदेश में भारी तबाही मचाई है। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि 20 जून से 19 सितंबर तक 427 लोगों की मौत हो चुकी है और 47 अभी भी लापता हैं। प्रदेश को 5000 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है। आपदा में 651 पक्के और 1012 कच्चे घर पूरी तरह से ढह गए, जबकि 2287 पक्के और 4908 कच्चे घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए। 584 दुकानें और फैक्ट्रियां, 58 लेबर शेड, 7048 गोशालाएं और 104 घराट व श्मशान घाटों को भी नुकसान पहुंचा। अब प्रदेश पूरी तरह से क्षतिग्रस्त घर के पुनर्निर्माण के लिए सात लाख रुपए का अनुदान दिया जा रहा है, जबकि केंद्र सिर्फ 1.30 लाख रुपये देता है।
कच्चे और पक्के घरों के आंशिक नुकसान पर एक लाख, दुकान और ढाबे पर एक लाख, गोशाला पर 50 हजार, कृषि व बागबानी भूमि पर 10 हजार रुपए प्रति बीघा और गाय-भैंस की मृत्यु पर 55 हजार रुपए की सहायता दी जा रही है। इसी तरह घरेलू सामान पर 70 हजार, किराएदारों के सामान पर 50 हजार, मकान में गाद भरने पर 50 हजार, पॉलीहाउस के नुकसान पर 25 हजार और फसल के नुकसान पर 4000 रुपए प्रति बीघा का प्रावधान किया गया है। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और मुख्यमंत्री राहत कोष से जिलों को 270 करोड़ से ज्यादा की राशि जारी हो चुकी है। मंत्री ने बताया कि अब तक बाजार में सवा दो करोड़ सेब की पेटियां पहुंच चुकी हैं। मार्केट इंटरवेंशन स्कीम के तहत बागबानों से 67 हजार मीट्रिक टन सेब खरीदा गया है।
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