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Shimla. शिमला। बागबानी का क्लस्टर डिवेलपमेंट प्रोजेक्ट हिमाचल प्रदेश ने छोड़ दिया है। केंद्र सरकार ने लगभग तीन साल पहले यह परियोजना प्रदेश को दी थी, जिसमें केंद्र सरकार से 50 करोड़ रुपए दिए जाने थे और इसमें इतनी ही मैचिंग ग्रांट राज्य सरकार को भी देनी थी। हालांकि किसी भी सरकारी निर्माण एजेंसी ने इसमें हाथ नहीं डाला। उसका एक बड़ा कारण यह था कि उसी तरह का एक अन्य प्रोजेक्ट वल्र्ड बैंक की सहायता से यहां पर चल रहा था। हालांकि अब वह पूरा हो गया है, लेकिन इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट का काम उसमें काफी ज्यादा हो चुका है। ऐसे में हिमाचल ने इस प्रोजेक्ट को छोड़ दिया है और इस पर काम करने से इनकार कर दिया है। प्रदेश के बागबानी मंत्री जगत सिंह नेगी का कहना है कि इसमें हिमाचल को ज्यादा फायदा नहीं दिख रहा था। जिन स्थानों पर आधारभूत ढांचा विकसित करने के लिए क्लस्टर डिवेलपमेंट प्रोजेक्ट दिया जा रहा था, वहां पर पहले ही काम हो चुका है।
यह योजना पूर्व सरकार के समय में आई थी, लेकिन उसने भी इसे आगे नहीं बढ़ाया। वहीं, वर्तमान सरकार ने भी सरकारी निर्माण एजेंसियों से इस पर राय ली, मगर वे भी काम करने को तैयार नहीं थीं। इस प्रोजेक्ट को एचपीएमसी को दिया जा रहा था, लेकिन उसने भी इसे लेने से इनकार कर दिया। उन्हें कहा गया था कि जनजातीय क्षेत्र किन्नौर में इस प्रोजेक्ट को चलाया जाए, मगर एचपीएमसी को इसमें कोई फायदा नहीं दिखा। इससे पहले बागबानी विभाग को खुद इस परियोजना को क्रियान्वित करने को कहा गया, जिसने भी इस पर काम नहीं किया। ऐसे में जब निर्माण एजेंसियां ही रुझान नहीं दिखा रही थीं, तो सरकार इस पर आगे कैसे बढ़ती। बागबानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि प्रदेश हित में जो प्रोजेक्ट होगा, उसे ही अपनाया जाएगा ताकि लोगों को लाभ मिल सके।
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