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अमरावती: आंध्र प्रदेश सरकार ने पत्रकारों पर हमले और मारपीट की घटनाओं से जुड़े मामलों की जांच के लिए हाई पावर कमेटी का पुनर्गठन किया है। यह समिति दो साल की अवधि के लिए पत्रकारों के खिलाफ हुई कथित हिंसा और हमलों के मामलों की समीक्षा करेगी। सरकार के इस कदम का उद्देश्य ऐसे मामलों की जांच के लिए एक संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करना है। पुनर्गठित समिति की अध्यक्षता राज्य के गृह मंत्री करेंगे, जबकि सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री को समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया है। समिति में सरकार और प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पुलिस विभाग के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है।
इसके अलावा पत्रकार संगठनों, पत्रकार यूनियनों, मीडिया एसोसिएशनों और अन्य संबंधित प्रतिनिधियों को भी समिति में स्थान दिया गया है। इस तरह समिति में प्रशासन, पुलिस और मीडिया क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। समिति को पत्रकारों पर हमले और कथित मारपीट से जुड़े मामलों की समीक्षा करने के साथ-साथ संबंधित परिस्थितियों की जांच का जिम्मा दिया गया है। इसमें यह देखा जा सकता है कि घटनाओं में किन परिस्थितियों में पत्रकारों के साथ हिंसा हुई और संबंधित मामलों में अब तक क्या कार्रवाई की गई। पत्रकारों पर होने वाले हमलों को लेकर समय-समय पर सुरक्षा और स्वतंत्र पत्रकारिता से जुड़े सवाल उठते रहे हैं। ऐसे मामलों की जांच में पत्रकार संगठनों और मीडिया प्रतिनिधियों की भागीदारी से घटनाओं से जुड़े विभिन्न पक्षों को समिति के सामने रखने का अवसर मिलेगा।
दो साल की अवधि के लिए गठित समिति संबंधित मामलों की समीक्षा कर सरकार के सामने अपनी रिपोर्ट और सुझाव रख सकती है। समिति में वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किए जाने से जांच प्रक्रिया में विभिन्न पक्षों की जानकारी लेने की व्यवस्था बनाई गई है। आंध्र प्रदेश सरकार के इस फैसले के बाद पत्रकारों पर हमले से जुड़े मामलों की समीक्षा के लिए समिति अब पुनर्गठित स्वरूप में काम करेगी। इसके जरिए लंबित या सामने आने वाले मामलों पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत विचार किए जाने की उम्मीद है।
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