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Shimla. शिमला। प्रदेश हाई कोर्ट ने कांगड़ा जिले के शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक की डिप्टी चीफ व्हिप के पद पर नियुक्ति को चुनौती देते हुए प्रतिवादी बनाने वाले आवेदन पर नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने मामले में प्रतिवादियों को तीन सप्ताह के भीतर आवेदन का जवाब दायर करने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान व न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने टेक चंद व अन्य तीन प्रार्थियों की ओर से दायर आवेदन पर उपरोक्त आदेश पारित किए। प्रार्थियों ने सचेतक के वेतन भत्ते और अन्य सुविधाएं अधिनियम 2018 को असंवैधानिक घोषित करने की गुहार लगाई है। प्रार्थियों ने इनकी नियुक्तियों से जुड़ी अधिसूचना संबंधी आदेशों को रद्द करने की भी मांग की है।
याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 में किए गए संशोधन के मुताबिक किसी भी प्रदेश में मंत्रियों की संख्या विधायकों की कुल संख्या का 15 फीसदी से अधिक नहीं हो सकती। राज्य सरकार ने सैलरी अलाउंसेस एंड अदर बेनिफिट्स ऑफ चीफ व्हिप एंड डिप्टी चीफ व्हिप इन लेजिसलेटिव असेंबली ऑफ हिमाचल प्रदेश एक्ट 2018 बनाया है, जिसके तहत मुख्य सचेतक व उपमुख्य सचेतक की नियुक्ति करने बाबत प्रावधान बनाया गया है। उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्रदान करने का प्रावधान बनाया गया है। सचेतक का पद मंत्री के पद के बराबर है। हालांकि उसे मंत्री नहीं कहा जाता, मगर उसे सभी वही सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, जो एक मंत्री को प्रदान की जाती हैं। प्रार्थियों ने सरकारी सचेतकों की नियुक्ति को भारतीय संविधान के प्रावधानों के विपरीत ठहराते हुए इन्हें रद्द करने की गुहार लगाई है।
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